सादर अभिवादन
माता श्री विदा होने को है
अश्रुओं की धार
थमने का नाम ही ले रही
...तसल्ली दे रही है माँ
बीस दिनों के बाद फिर आ रही हूँ मैं
महालक्ष्मी का रूप धर कर
खील-पताशे..बाजे-गाजे से स्वागत करना मेरा
वास करूँगी घर में तेरे..
चलिए चलते हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर...
पहली बार..
सोचती हूँ इक रोज.....सालिहा मंसूरी
सोचती हूँ इक रोज
तुमसे मिलकर,
तुम्हें सब कुछ बता दूँ
तुम्हें बता दूँ-
माता श्री विदा होने को है
अश्रुओं की धार
थमने का नाम ही ले रही
...तसल्ली दे रही है माँ
बीस दिनों के बाद फिर आ रही हूँ मैं
महालक्ष्मी का रूप धर कर
खील-पताशे..बाजे-गाजे से स्वागत करना मेरा
वास करूँगी घर में तेरे..
चलिए चलते हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर...
पहली बार..
सोचती हूँ इक रोज.....सालिहा मंसूरी
सोचती हूँ इक रोज
तुमसे मिलकर,
तुम्हें सब कुछ बता दूँ
तुम्हें बता दूँ-
मै कल ही,
अपने एक मित्र से मिला
पेशे से वह बीमा एजेंट है,
मिलते ही उसने
बीमा की रपट लगायी |
प्रकृति की शोभा....मालती मिश्रा
यह अरुण का दिया
ला रहा विहान है,
रक्त वर्ण से मानो
रंगा हुआ वितान है।
पवन मदमस्त हो चली
झूमकर लहराती गाती,
यह अरुण का दिया
ला रहा विहान है,
रक्त वर्ण से मानो
रंगा हुआ वितान है।
पवन मदमस्त हो चली
झूमकर लहराती गाती,
ज़माने ने कोशिश बहुत की उड़ाने की
हम वो परिंदे थे जो पिंजरे में बंद थे
कभी तो गुजारिश नवाजिश से महकेगी
वरना ज़िन्दगी तनहा तो कट ही रही है
माया से काया है
काया ने सब जुटाया है
मुझे तुमसे
तुम्हें मुझसे मिलवाया है
इस समुदाय के अनुसार शरीर से आत्मा के निकलने के बाद वो एक खाली बर्तन है, जिसे सहज के रखने की जरुरत नहीं है. इसलिए वे लोग इसे आकाश में दफ़न कर देते है. इसे sky burial कहा जाता है.
दूसरी बात जो तिब्बत के लोग मानते हैं कि शवों को दफनाने के बाद भी कीड़े मकोड़े ही खा जाते है और इसलिए गिद्धों को खिला देते है.
एक साल पहले....
खुद भी चैन से रहना
और रहने देना हो ‘उलूक’
आदत हो पता हो
आदमी के अंदर से
आदमी को निचोड़ कर
ले आना समझ में आता हो
अनदेखा ना होता हो
भला मानुष कोई भी
कहीं इस जमाने में
जो किताबों से इतर
कुछ मंत्र जमाने के
हिसाब के नये
बताता हो समझाता हो ।
आज्ञा दें यशोदा को..
फिर मिलेंगे..
एक साल पहले....
खुद भी चैन से रहना
और रहने देना हो ‘उलूक’
आदत हो पता हो
आदमी के अंदर से
आदमी को निचोड़ कर
ले आना समझ में आता हो
अनदेखा ना होता हो
भला मानुष कोई भी
कहीं इस जमाने में
जो किताबों से इतर
कुछ मंत्र जमाने के
हिसाब के नये
बताता हो समझाता हो ।
आज्ञा दें यशोदा को..
फिर मिलेंगे..






