शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ.(सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं गुरुवारीय अंक की पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
कविता | सिसकता है प्रेम | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
डाल पर होने की खुशी
और बिछड़ने का ग़म
वही जानता है
जो छूट जाता है,
वह नहीं जो छोड़ जाता है
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