सादर नमस्कार
दीपावली को बस कुछ ही दिन शेष
पटाखे न जलाएं तो अच्छा
कम ही चलाएं स्वस्थ रहेंगे
मिली जुली
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यूँ तो अभी हाल ही में हमारे भारत की वर्तमान सरकार की एक और उदारता देखने / सुनने के लिए मिली है, जब हाल ही में बांग्लादेश की पदच्युत प्रधानमंत्री - शेख हसीना जी के बांग्लादेश से जान बचाकर भारत भाग आने के बाद से आज तक यहाँ किसी गुप्त स्थान पर उनको सुरक्षित शरण मिली हुई है।
हमें आ गया संभल कर भी चलना,
मगर लड़खड़ाने की आदत वही है..
ग़मों का ये बोझ अब बढ़े भी तो क्या?
ग़म में मुस्कुराने की आदत वही है..
बहुत सी बातें जो मैं जानता हूँ
तुम न ही जानों तो अच्छा ...
इस भौतिक जगत में जो भी आया
वह एक न एक दिन जाएगा जरूर
यह तथ्य वह हमसे पहले जान लेता है
क्यों न हम भी छोटे-छोटे कदमों से
अंधेरे कोनों में भी दीप जलाते रहें
दीप बन जग में उजियारा फैलाएं
अतिथि गृह में स्वयं भोजन बनाने की सुविधा भी प्रदान की गई है। खुला-खुला डाइनिंग हॉल छत के नीचे तथा बाहर बगीचे तक फैला हुआ है। चारों और बाग-बगीचे हैं, जिनमें टेराकोटा के सुंदर विशाल घड़ों व गमलों में पौधे उगाये गये हैं। हम चार दिन वहाँ रहे, हर दिन थम-थम कर वर्षा होती रही। ऑरोविल में ऐसे कई अतिथि गृह हैं। वहाँ के प्रसिद्ध सोलर किचन में दोपहर व रात्रि का भोजन किया जा सकता है, स्वादिष्ट व पौष्टिक प्रातः राश अतिथिगृह में मिलता है। पूरे आश्रम में कैश के रूप में धन का उपयोग नहीं किया जाता है, हर अतिथि को ज़रूरत के अनुसार मूल्य का एक ऑरो कार्ड दिया जाता है, जो हर जगह इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब रिश्तों में जान नहीं
रहा नहीं है स्नेह
संवेदना से शून्य हुए
गहरे है संदेह
जीवन से अब चला गया
कुदरत से अनुराग
संबंधों की शाख कटी
लगी हुई है आग
****
बस





