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गुरुवार, 29 अगस्त 2024

4231...तुम निकरे खौलत भये पानी...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ. (सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

गुरुवारीय अंक में पढ़िए पाँच चुनिंदा रचनाएँ-

विप्र सुदामा - 50

मीत  हमारा  था  अति मेधावी,

अति प्रिय था संदीपनि गुरु का।

आज हम हैँ दोनों अलग अलग,

पर दोनों  का नाता  आश्रम का।।

*****

बुंदेली ग़ज़ल रामधई डॉ (सुश्री) शरद सिंह

जो तुम हमरो भलो चात हो

हमरे  कांटा  चुनोरामधई!

 तुम निकरे खौलत भये पानी

हम समझे गुनगुनोरामधई!

*****

जब क्लास ले ली सब्जी वाली अम्मा ने! किस्सा-ए-रायपुर

तो बात हो रही थी हमारे विस्थापन की ! हमारा ठिकाना बना था, न्यू शांति नगर ! तो एक बार ठंड के दिनों में ऐसे ही विभिन्न खाद्य पदार्थों की रायपुर में उपलब्धि पर चर्चा में मकई का आटा भी आ फंसा ! उन दिनों किराने की सबसे नामी दूकान घनश्याम प्रोविजन स्टोर हुआ करती थी, जो मोती बाग के पास चौराहे पर, मालवीय रोड़ से फर्लांग भर दूर स्थित थी। बताया गया कि और कहीं मिले ना मिले वहाँ जरूर मिल जाएगा!मैंने अपना स्कूटर उठाया और पहुँच गए घनश्याम किराना भंडार ! दस मिनट भी तो नहीं लगते थे ! *****

मेरी नज़र से

बाढ़ को "मौसमी हत्यारा" कहा जाता है। क्योंकि इससे हजारों लोगो को जिंदगियां प्रभावित होती है। कुछ तो बाढ़ की बिभीषिका के बलि चढ़ जाते हैं और कुछ बाढ़ के गुजरने के बाद जिन्दा होते हुए भी मरे से भी बतर जीवन गुजारने को मजबूर होते  हैं। क्योंकि बाढ़  के बाद की तबाही का मंजर बहुत भयानक होता है जिसका असर महीनो चलता है।

*****

ड्रोन की उड़ान

अंकल की आँखों की विवशता देखकर अच्छा नहीं लग रहा था पर कुछ भी किया नहीं जा सकता था। ड्राइवर की बात वे कैसे टालते, जो रोज़ शाम को उन्हें गाड़ी में बिठाकर बगीचे के पास उतार देता है और जब छड़ी के सहारे वे टहलते हैं तो उनके साथ-साथ चलता है।मेहमान नहीं आ पाये, सखी के पतिदेव की पीठ में दर्द हो गया था। अब गार्लिक ब्रेड के सैंडविच उन्हें अकेले ही खाने होंगे।मौसम आजकल दिन में गर्म रहता है पर सुबह ठंडी रहती है अभी भी।

*****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


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