नमस्कार
सुप्रभात सादर प्रणाम
आज का अनमोल वचन
बड़प्पन शालीनता से मिलता है पद और प्रतिष्ठा तो उसे चमकाते भर है ।
आज की प्रस्तुति.....
उसने दो डायरी मुझे गिफ्ट की
और कहा रख लो तुम्हारे काम आएंगी
मैंने रख ली
बिना किसी ख़ास उत्साह के
उनकी खूबसूरती पर
मैं इस कदर मुग्ध था कि
उन पर लिखकर कुछ भी
उनका सौंदर्य नही खत्म करना चाहता था
चिट्ठी आई है। किसी के घर में नहीं बल्कि मीडिया में आई है। किसी ऐरे-गैरे ने नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के महानायक ने इसे लिखा है। इसलिए ये चिट्ठी स्वतः ही चिट्ठियों की महानायिका बन गई और मीडिया ने इसे हाथों-हाथ ले लिया। इसमें वास्तविक जीवन में नाना-दादा का डबल रोल कर रहे महानायक की भावनाओं का समंदर भरा हुआ है।
देशभक्तों ने किया खाली,खजाना देश में !
धनकुबेरों को बिका, शाही घराना देश में !
बेईमानों और मक्कारों की छबि अच्छी रहे,
जाहिलों पर मीडिया का,मुस्कराना देश में !
गेरुए कपडे पहन कर, डाकू व्यापारी बने
कैसे, कैसे धूर्तों का , हाकिमाना देश में !
मन की उड़ान
रोके से नहीं रूकती
मुझसे तो
सामने मत
आया करो
शिकायत है अगर
तुमको तो
हर दिन ..हर पल...हर छण..
कहीं न कहीं...
इधर....उधर...और जाने किधर
प्रतिस्पर्धा सी हो गई अब तो
कौन कितना दर्द देगा...
और निर्णय आएगा...
अख़बार इन्टरनेट पर
पत्र पत्रिकाये में
और फिर कुछ लोग तो है ही
पीडिता का फिर से करने
बलात्कार...
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रविवार की छुट्टी का
आनन्द लिजिए
और
मुझे दिजिये
आज्ञा
विराम सिंह सुरावा
