सादर अभिवादन
हर साल 29 जनवरी को बीटिंग द रिट्रीट (Beating The Retreat) समारोह होता है. यह समारोह विजय चौक पर आयोजित होगा. इसी को साथ गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन किया जाता है. इस कार्यक्रम में थल सेना, वायुसेना और नौसेना का बैंड ट्रेडिशनल बीट के साथ मार्च करते हैं और राष्ट्रपति को नेशनल सैल्यूट दिया जाता है. इस बार कैसे होगी सेरेमनी ...
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन, रिहर्सल देखने पहुंचे लोगों में दिखा उत्साह
अब देखिए कुछ रचनाएं ...
हर कोई अचम्भा कर रहा,
अति भीड़ जुटी बाहर महल।
विप्र छानी जगह रातों रात,
कैसे बना यह भव्य महल।।
नाथ मुरलीधर की रही कृपा,
जो रातों रात बन गया महल।
नाथ हमने कुछ भी माँगा नहीं,
अब तो पधारो अपने महल।।
वह पहाड़ियों की ढलान से
भेड़ें हाँककर आता है
और वह उसे पश्मीना ओढ़ा देती है
वह खाली गिलास की ओर देखता है
वह पानी लिए हाजिर होती है
वह पाँवों की उँगलियों को भीतर की ओर मोड़ता है
मुख पर है तेज़ , होंठ हैं मुस्कुराते
ऐसे मेरे राम लला,अवध में विराजे !!
महफिल में दीपक सोच रहा अकेला
है वह कितना अकेला सहभागियों के बिना
पहले वह सोचता था उसे किसी की जरूरत नहीं
तभी चला आया अकेले महफिल में |
यहाँ देखा वह ही अकेला था
कोई न था उसका साथ देने के लिए
कीट पतंगेपूँछ रहे थे कहां गए तुम्हारे सहचर
फिर किसी से शिकायत क्या ?
सब कुछ पड़ेगा स्वयं ही करना ।
झाड़ना-बुहारना,सुधारना,बदलना,
अपने ही तंत्र को दुरुस्त करना ।
दुरुस्त रखना ..गणतंत्र
जब एक
'उलूक' तक
अपने कोटर में
तिरंगा लपेटे
“जय हिंद”
बड़बड़ाते हुऐ
गणतंत्र
दिवस के
स्वागत में
सोता सोता
सा रह गया था ।
आज बस
कल सखी आएगी
सादर
कल सखी आएगी
सादर




