सादर अभिवादन
आज आदरणीय विभा दीदी को आना था
पर किसी कारण से फिलहाल वे इस जिम्मेदारी से मुक्त
होना चाहती है ....
हमारे मंच की सबसे ज्यादा कर्मठ और समर्पित सदस्य,
जिन्होंने आज तक कभी भी छुट्टी नहीं ली।
बीमारी हो या अन्य कोई व्यक्तिगत जिम्मेदारी,
प्रस्तुति न बनाने का
उनके पास कोई बहाना कभी नहीं रहा
पाँच लिंक के नींव का पत्थर है विभा दी,
उनके वापसी की सदैव प्रतीक्षा रहेगी।
मैं जानती हूँ उनका स्नेह और आशीर्वाद
हमेशा हमारे साथ है...।
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ब्लॉग जगत के पाठकों की उदासीनता चर्चाकारों
के मनोबल पर खासा असर करती है
अब रचनाएं देखते हैं-
अपने गेसू मे उलझा के
आँखों में डुबोने को हाँ कह गये ।
जालिम ने महसूस कर लिया
मेरा खुद से उलझना शायद ।।
आप खुद को अगर
अधिक जानते हैं
तो उस अवस्था में
आप बहुत कुछ दे सकते हैं
इस दुनिया को जैसे
सदाचार ,भरोसा, अनुराग....
......
भाई कुलदीप जी अब नहीं आएंगे...।
सादर

