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रविवार, 7 अगस्त 2016

387.....व्यर्थ नही है यह जीवन

नमस्कार 
सुप्रभात 
सभी बड़ो को
सादर प्रणाम 

कल 6 अगस्त के दिन आज से 71 साल पहले कलयुग के भयानक और विध्वंसक हथियार का पहली बार प्रयोग किया गया था । जिसमे जापान के हिरोशिमा शहर को उस हमले का घाव सहने पडे थे ।



उस दिन दुनिया मे मौसम आदमखोर हुआ
जिस दिन हिरोशिमा मे परमाणु विस्फोट हुआ
सुरज सबसे पहले किरणे जिस धरती को देता है
बोद्ध धर्म की उस नगरी मे भीषण नरसंहार हुआ ।।"

"6 अगस्त को अमेरिका अपनी औकात दिखा बैठा
बेकसुरो पर हमला करके अपनी जात दिखा बैठा
0.7 ग्राम यूरेनियम का यह परिणाम हुआ देखो
पल भर मे ही लाखो लोगो का नरसंहार हुआ ।।"




हर बार औरत ही क्यों
मनुहार करे ....
क्यों वही प्यार से 
जीने की बात करे ....
क्यों वही बच्चो
के नाज़ नखरे उठाये ....
ससुराल में तारतम्य
बैठाये ....
जब दो इंसानो ने
जीवन में साथ रहने
के सात वचन लिए
तो हर वचन वही
क्यों निभाने की कोशिश करे ??




व्यर्थ नही यह जीवन 
बहुत कुछ करना
अभी शेष है 
आज भी ऊर्जा 
बचा रखी है 
बहुत कुछ कर गुजरना है 
एक ऐसा  ही
कार्य चुना है 
जिसे पूर्ण करना है 
जिन्दगी की
शाम उतर आई है





'हम-तुम'
यूं ही लड़ते झगड़ते
हो गए दूर
पर अब भी
बातों का 
शिकवों का
आंसुओं और उम्मीदों का
सिलसिला बदस्तूर जारी है,.

पर 
क्या तुम्हे लगता है,
हम फिर मिलते
तो सुलझ जाते मसले


******* 
सुनो साथी  
चलो चलते हैं  
नदी के किनारे  
ठंडी रेत पर  
पाँव को ज़रा ताज़गी दे  
वहीं ज़रा सुस्ताएँगे  
अपने-अपने हिस्से का  
अबोला दर्द  
रेत से बाँटेंगे  
न तुम कुछ कहना  
न हम कुछ पूछेंगे 





जय हो 
जंगल की 
जय हो 
शेरों की 
जय हो 
भक्तों की 
जय हो 
सरकार 
और 
सरकारी 
आदेशों की 
जय हो उन 
सभी की 
जो इन सब 
की बत्ती 
बनाने वालों 
को देख 
समझ  कर 
खुद 
अपने अपने 
हनुमानों की 
चालीसा 
गा रहे हैं

●●|●●●●|||●●●●|||

आज के लिए 
इतना ही 
फिर मिलेंगे अगले 
रविवार को   
धन्यवाद 
सादर 



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