सादर अभिवादन
इतवार से करूँगा !
पहली तारीख से करूँगा !!
नए साल से करूँगा !!!
बरसों से रूके काम शुरू करने के लिए
ये तीनों मुहूर्त एक ही दिन आ रहे हैं !!!!
आदरणीय विभा दीदी अपनी प्रस्तुति मे उपरोक्त
पंक्तियां लिखी...पढ़िए फॉलो करिए और
अपना कहा मान लीजिए
रचनाए.....
अर्द्धरात्रि के अंधियारे में,
एक साल काल का डूबता।
क्षण में दूर क्षितिज से उसके,
दूसरे साल का सूरज उगता।
नए शब्द हों, नए इरादे,
नया-नया हो क्रम जीवन का,
नई पुलक हो, नव उमंग हो,
नया राग हो नादाँ मन का !
पुराने साल,
तुम्हारे जाने के बाद
मैं तुम्हें शायद ही याद करूं,
पर लगाए रखूंगा
दीवार पर तुम्हारा कैलेंडर,
जैसे बच्चे लगाए रखते हैं,
माँ-बाप के फ़ोटो
उनके जाने के बाद.
आह रात की रूदन दिवस की
मही निरीह सी दुःखी मलीन सी
नेत्र नीर मैं बहा जाता हूं
वक्त हूं मैं बदल जाता हूं....
.....
जाओ फिर अब न आना
जाओ फिर अब न आना
अलविदा
आज बस
सादर





