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शनिवार, 24 दिसंबर 2022

3617... याद



 हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...

जब किसी यौगिक शब्द  शब्द से किसी रूढ़ अथवा विशेष अर्थ का बोध होता है अथवा जो शब्द यौगिक संज्ञा के समान लगे किन्तु जिन शब्दोँ के मेल से वह बना है उनके अर्थ का बोध न कराकर, किसी दूसरे ही विशेष अर्थ का बोध कराये तो उसे योगरूढ़ कहते हैँ।

आप भुलाकर देखो, हम फिर भी याद आएंगे,

आपके चाहने वालों में,

आपको हम ही नज़र आएंगे,

आप पानी पी-पी के थक जाओगे,

पर हम हिचकी बनकर याद आएंगे.

देखती रह गयी तलवारें सब, बिछड़ते वक्त..

उनके लफ्जों का वार इतना कमाल का था।

कहीं यादों का मुकाबला हो तो बताना जनाब..

हमारे पास भी किसी की यादें बेहिसाब होती जा रही हैं।

एक ही हादसा तो है और वो यह के आज तक

बात नहीं कही गई बात नहीं सुनी गई

बाद भी तेरे जान-ए-जां दिल में रहा अजब समाँ

याद रही तेरी यां फिर तेरी याद भी गई

दिल की हर बात कहना कोई जरूरी नही,

अपने लबों पर खामोशी सजाए रखिये|

तनहा न रहोगे इस दुनिया में कभी भी

यार न सही, एक दुश्मन बनाए रखिये|

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पुनः भेंट होगी...
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