सादर अभिवादन
आज गाँधी - शास्त्री जयन्ती है
आज कोई आख्यान या भाषण नहीं
सब जानते हैं..और नही जानते हों
तो ये सुनिए
सब जानते हैं..और नही जानते हों
तो ये सुनिए
सुन ले बापू ये पैगाम
अब रचनाएँ
दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की दशा देखकर उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का आरंभ किया, आज भी वहाँ उन्हें आदर से याद किया जाता है और नेल्सन मंडेला के उनके रास्ते पर चलकर अपने देश को आज़ाद कराया। गांधी जी ने अस्पृश्यता जैसे सामाजिक रोग को दूर करने के लिए बहुत कार्य किया। नारियों की शक्ति को पहचान कर उन्हें शिक्षा प्राप्त करने व सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
तुम कह देती तो
मैं सुन लेती।
यूं आंसुओं का,
पलकों के भीतर सूख जाना
अवरुद्ध कंठ का
रह रह भर आना
बहुत तकलीफ़ भरा होता है।
”कामवालियों के हाथों में लकीरें नहीं होतीं !”
एक ने मेहँदी रचे हाथ दिखाते हुए कहा।
उसने पीछे मुड़कर देखा, फिर बर्तन धोने लगी।
”तुम्हें दुख नहीं होता!”
दूसरी ने धुली कटोरियाँ उठाते हुए कहा।
क्या मुझसे ही मनावारे करवाओगे
क्या कोई और न मिला तुम्हें मेरी जगह
मुझे सताने के सिवाय मुझे रुलाने के लिए
मैंने सोचा न था तुम्हारा व्यबहार
ऐसा भी हो सकता है |
आज बस
सादर



