निवेदन।


फ़ॉलोअर

3533 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
3533 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 1 अक्टूबर 2022

3533... तितली

हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...

तितली अंतिम...हाँ एकदम अंतिम...

इतने भरेपूरे, सुर्ख और चमकदार पीतवर्णी

लगता है जैसे सूरज के आँसू गा रहे हों

किसी झक सफ़ेद चट्टान पर बैठ कर गीत....

ऐसे चकित करने वाले पीतवर्णी तितली

उठते हैं ऊपर हवा में हौले हौले...

मुंह बरसाने वाला है,

बाहर जब पर होंगे गीले,

धुल जाएंगे रंग सजीले,

झड़ जाएगा फूल, ना तुझको

बचा सकेगा छोटी तितली बदल रहे

हर रोज ही, हैं मौसम के रूप !

ठेठ सर्द में हो रही, गर्मी जैसी धूप !!

सूनी बगिया देखकर, तितली है खामोश !

जुगनूं की बारात से, गायब है अब जोश !!

दें सुनाई अब कहाँ, कोयल की आवाज़ !

बूढा पीपल सूखकर, ठूंठ खड़ा है आज !!

तितली

>>>>>><<<<<<
पुनः भेंट होगी...
>>>>>><<<<<<
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...