सादर अभिवादन
आज अट्ठाईसवां दिन अगस्त का
अगला रविवार आएगा सितंबर को
विदा अगस्त.....
रचनाएँ देखें ...
सहेजा हुआ है,
मैंने ज़ख़्म अपना
छिले हुए टखने और कोहनी
बता रही मेरी गुस्ताखियाँ
दिखते हैं उस पर रक्त के धब्बे
जैसे गुलाब की सुर्ख़ पंखुड़ियां
देवता भी सिर धुने अब
धर्म ठिठका सा खड़ा
ये सृजन किसका किया है
व्यर्थ बातों पर अड़ा
दंश नित वह दे रहा है
सत्य का होता दमन
वैज्ञानिक मनके कहना हे- करेला म विटामिन A, B अउ C पाए जाथे. एकर छोड़े कैरोटीन, बीटाकैरोटीन, लूटीन, आयरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम अउ मैगजीन आदि घलो पाए जाथे. जेकर सेती उपास रहे के सेती होइवया जलन या गरमी ले बचाथे. पित्त, कफ रुधिर विकार ले बचाथे. पाण्डुरोग, प्रमेह अउ कृमि के नास घलो करथे.
मौन प्रकृति का
रुप सलोना
मुखरित मन का
कोना-कोना
खुल गये पंख
कल्पनाओं के
छप से छलका
याद का दोना।
यह प्रेम पत्र ही था जो
असफल प्रेमी को
सफल शायर बना दिया करता था
वरना...
प्रेम की इतनी मजाल कि ...
टूटे दिल का मुशायरा कर ले।।
आज बस
सादर




