सादर अभिवादन
नव वर्ष की पहली प्रस्तुति
कोई कुछ कह गया
कोई कुछ कहने आया है
जो कह गया
उसकी मलाई छांट लें
जो कहने वाला है
उसकी सिर्फ मलाई ही लें
....
रचनाएँ..
मैं बीस इक्कीस -
देखता हूँ आज जब
क्या वक़्त था
एक वर्ष पूर्व
मेरे आगमन से पहले
उम्मीद बाँधे दुनिया
कर रही थी मेरा इंतज़ार
इतनी सारी फरमाइशों के साथ
एक गुजारिश और है तुम से
इस मिनी को जब भी
संभालने की बारी आए
तो बस कुछ प्यार और दुलार
से भरे लफ्ज़
खर्च कर देना उस पर।।
घने कोहरे में हो जाता है
जीवन अस्त-व्यस्त,
भिड़ जाते हैं वाहनों से वाहन,
खड़े रह जाते हैं विमान,
थम जाती हैं रेलगाड़ियाँ,
चलते चलो कदम बढ़ाओ
राह में रुकना नहीं
अनवरत चलो उत्साह से
पीछे पलट कर न देखना |
काश, जिस तरह जेएनयू ने लड़कियों को हिदायत दी, उसी प्रकार वे लड़को को भी हिदायतें देते... लड़कों को लड़कियों की इज्ज़त करना सिखाते तो किसी कॉलेज, किसी सड़क और किसी घर की बेटी के साथ कुछ गलत न होता! काश, सच में ऐसी कोई रेखा होती जिसे पार कर कोई दरिंदा किसी भी लड़की की इज्जत को तार-तार नहीं करता, लेकिन अफसोस दुनिया में ऐसी कोई रेखा है ही नहीं, यह तो सिर्फ गलती छिपाने का एक बहाना है।
आज बस इतना ही
सादर