सादर अभिवादन
ढेर सारी प्रतियोगिताएँ
चल रही है, फेसबुक में
सारे ब्लॉगर वहीं जमे हुए हैं
सोच रहे हैं हम भी एक
प्रतियोगिता आरम्भ कर दें
आप सभी की राय ज़रूरी है
कृपया सुझाव दें कि
नए वर्ष में क्या कुछ नया करें
बताइएगा....
आज की रचनाएँ....
उस अनाम से फलित सदा हो
स्वयं का ही दर्शन स्वयं को,
एक याद युग-युग से विस्मृत
पुन: आ गई मिटा संशय को !
हिंदी भाषा राष्ट्र की,देवनागरी सार।
उच्चारण आसान है,भरा शब्द भंडार।।
भरा शब्द भंडार,रही संस्कृत हमजोली।
भौगोलिक विस्तार,सभी बोलें ये बोली।।
कहती आख्या बात,रही माथे की बिंदी।
ले उर्दू का साथ,मस्त है भाषा हिंदी।।
यह शरीर को ऊर्जावान बनाता है ! थकान महसूस
नहीं होने देता ! सुस्ती दूर करता है ! शरीर
में लाभकारी बैक्टेरिया की बढ़त होती है ! शरीर की
बढ़ी हुई गर्मी कम होती है ! पेट के लिए बहुत मुफीद है !
रक्तचाप को नियंत्रित करता है
बड़े दिनों बाद आवाज़ लगाई
सूखे पत्तों से सजे आँगन ने
बाहें फैलाए स्मृतियाँ
स्वागत में प्रीत दीप जलाए
वात्सल्य वीरानियों में
सभी हैं सवार, एक ही नैया, एक ही खेवैया,
उन्मुक्त है नीला पाल,दोनों तरफ खेलते हैं,
सुखदुःख के उठते गिरते तरंग, बहे जा रहे
हैं सभी समयस्रोत में,
दूर बहुत दूर, माथे की उलझी लकीरों केसंग
......
आज बस
शायद कल फिर
सादर
आज बस
शायद कल फिर
सादर





