सोमवारीय विशेषांक
में आप सभी का
स्नेहिल अभिनंदन
------//-----
हमक़दम के विषयमिलावट की परिभाषा
शब्दों में समेट पाना
मेरे लिए मुमकिन नहीं।
दैनिक जीवन में मिलावट आम समस्या है।
हवा,पानी,भोजन,कपड़े दवा हमारे जीवनोपयोगी
सारी वस्तुओं में मिलावट नहीं अब शुद्ध होना आश्चर्य एवं संदेह का विषय है।
मनुष्य का मन भी मिलावट से अछूता कहाँ है?
★
सोचिये न मिलावट कहाँ नहीं है
बिना मिलावट तो जहांं नहीं है
देह,मन,जीवन,सृष्टि कण-कण में
मिलावट की कोई दवा नहीं है।
★★★★★
हमारे सभी रचनाकारों की
रचनात्मकता को सादर प्रणाम
हमक़दम के हर विषय पर
आप सभी का सहयोग सदैव
उत्साहवर्धक है।
★
कालजयी रचना
स्मृतिशेष गोपालदास नीरज
दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार
तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार
आँखों का पानी मरा हम सबका यूँ आज
सूख गये जल स्रोत सब इतनी आयी लाज
करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार
जब कि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार
.......
उदाहरणार्थ दी गई रचना
मिलावट ही मिलावट..
रिश्तों मे भी प्यार मिलावट,
सुख के साथी यार मिलावट,
दुख मे साथ कुछ ही चलते हैं,
बाकी सब संसार मिलावट.
संसद मे भी बात मिलावट,
वादों के हालात मिलावट,
सत्ताधारी,निज हितकारी,
नेताओं की जात मिलावट.
- विनोद कुमार पांडेय
में आप सभी का
स्नेहिल अभिनंदन
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हमक़दम के विषयमिलावट की परिभाषा
शब्दों में समेट पाना
मेरे लिए मुमकिन नहीं।
दैनिक जीवन में मिलावट आम समस्या है।
हवा,पानी,भोजन,कपड़े दवा हमारे जीवनोपयोगी
सारी वस्तुओं में मिलावट नहीं अब शुद्ध होना आश्चर्य एवं संदेह का विषय है।
मनुष्य का मन भी मिलावट से अछूता कहाँ है?
★
सोचिये न मिलावट कहाँ नहीं है
बिना मिलावट तो जहांं नहीं है
देह,मन,जीवन,सृष्टि कण-कण में
मिलावट की कोई दवा नहीं है।
★★★★★
हमारे सभी रचनाकारों की
रचनात्मकता को सादर प्रणाम
हमक़दम के हर विषय पर
आप सभी का सहयोग सदैव
उत्साहवर्धक है।
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कालजयी रचना
स्मृतिशेष गोपालदास नीरज
दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार
तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार
आँखों का पानी मरा हम सबका यूँ आज
सूख गये जल स्रोत सब इतनी आयी लाज
करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार
जब कि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार
.......
उदाहरणार्थ दी गई रचना
मिलावट ही मिलावट..
रिश्तों मे भी प्यार मिलावट,
सुख के साथी यार मिलावट,
दुख मे साथ कुछ ही चलते हैं,
बाकी सब संसार मिलावट.
संसद मे भी बात मिलावट,
वादों के हालात मिलावट,
सत्ताधारी,निज हितकारी,
नेताओं की जात मिलावट.
- विनोद कुमार पांडेय
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नियमित रचनाएँ
नियमित रचनाएँ
आदरणीय रोहिताश्व जी
हम गुस्सा निकाल कर खुश हो लेंगे
हमारी ही स्वीकृति से
जो लोग हुकूमत के मद्द में
अन्नदाता या सर्वज्ञ बन गए
उनकी असलियत इतनी ही है कि
इनको गरीबों की गलियां नहीं मिलती;
ठीक तीन लोक के ज्ञाता की तरह-
★
आदरणीय आशालता सक्सेना जी
आज के युग में जहां देखा वहीं है मिलावट
कोई नहीं बचा इसकी मार से
जहां जहां पड़े पैर शुद्धता के
मिलावट ने गर्दन पकड़ी पीछे से |
जब गेहूं लाए आटा पिसवाया
जल्दी में बीना नहीं ठीक से
इतनी किसकिसाहट आटे में थी
की वह कूड़ेदान के हुआ हवाले |
कोई नहीं बचा इसकी मार से
जहां जहां पड़े पैर शुद्धता के
मिलावट ने गर्दन पकड़ी पीछे से |
जब गेहूं लाए आटा पिसवाया
जल्दी में बीना नहीं ठीक से
इतनी किसकिसाहट आटे में थी
की वह कूड़ेदान के हुआ हवाले |
★
आदरणीय पी.सी.गोदियाल जी
मिलावट और
बनावट का युग है,
अपने चरम पर
पहुंचा कलयुग है,
सराफत की पट्टी माथे,
दहशतगर्दी का ढ़ंग !!
★
आदरणीय अनुराधा चौहान
दूषित होते खाद्य पदार्थ भी
पर्यावरण को स्वच्छ बनाते
पेड़ निरंतर कट रहे
नदी नाले पाट कर
उन पर बंगलें बन रहे
अब भी न चेता इंसान
★
आदरणीय शुभा मेहता
किसी को तो रखना होगा
पहला कदम
बहुत कठिन है
हाँ...पर नामुमकिन तो नहीं ..
क्या आप देगें साथ?
मैं भी चाहती तो बहुत थी
पर डरती थी
शायद हार से
★
आदरणीय सुजाता प्रिया जी
राजनीति की बात भी क्या।
है सत्ता की विसात भी क्या।
दलबदलुओं की दूसरे दल से,
गठजोड़ मिलावट दिखती है।
★
आदरणीय कविता रावत जी
इसमें दो राय नहीं है कि भारत में भूजल के अतिशय दोहन एवं प्रदूषण के कारण नाइट्रेट, अमोनिया, क्लोराइड, व फ्लोराइड का भूजल पर अत्यधिक दबाव है, नतीजतन घुलन ऑक्सीजन की मात्रा दिन-ब-दिन कम होती जा रहीं है। सभी वैज्ञानिक इस पर एकमत हैं कि भूमिगत जल कृषि कार्यों में रासायनिक खादों या उद्योगों में रसायानों का बेतहाशा इस्तेमाल से बुरी तरह प्रदूषित हो गया है। लंदन के शोधकर्ताओं ने यह साबित कर दिया है कि जहां पेयजल में लिंडेन, मालिथयोेन, डीडीटी और क्लोपाइरियोफोस जैसे कीटनाशक तत्व मौजूद रहते हैं वहाँ कैंसर, स्तन कैंसर, मधुमेह, रक्तचाप, कब्ज और गुर्दें सम्बन्धी रोग बहुतायत में होते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है।
★
आदरणीय कामिनी सिन्हा
आज "मिलावट"का सम्राज्य अपनी सारी हदों को पार कर चुका हैं और अब तो हम इस मिलावट के आदि भी हो गए हैं। मिलावट करने की प्रवृति हम में इस कदर समाहित हो गई हैं कि हमें खुद ही आभास तक नहीं होता कि -हम कब - कब, कहाँ -कहाँ, कैसी- कैसी मिलावट कर जाते हैं। हमने अपने धर्म ग्रंथो में मिलावट की ,अपने संस्कारों में मिलावट की ,अपनी स्नेह और सहयोग में मिलावट की, यहां तक कि - आज ममता भी मिलावटी हो गई हैं।कितना गिरेंगे,कहाँ तक गिरेंगे,कही रुकेंगे भी या नहीं ?
★
आदरणीय उर्मिला सिंह
जिंदाबाद .....
दवाओं में दुवाओं में दिखती है तूँ रिश्तों की कतारों में
इश्क़ में ईमान में तूँ ही तूँ दिखती धरती से आसमान में
बनावटी मुस्काने,बनावटी मन्दिर मस्जिद की अजाने
श्रध्दा छुप हुई असत्य की गोद में भगवान भी कैसे सुने फ़रियाद
जिंदाबाद -जिंदाबाद.......
★
आदरणीय ऋतु आसूजा
मिलावट का सच ...
सौ प्रतिशत सच का ,
मिलावटी सच
पक्के वादों का,
मिलावटी सच
दुग्ध में जल या जल में दुग्ध
मिलावट का अदृश्य सच
★
आदरणीय उर्मिला सिंह
जिंदाबाद .....
दवाओं में दुवाओं में दिखती है तूँ रिश्तों की कतारों में
इश्क़ में ईमान में तूँ ही तूँ दिखती धरती से आसमान में
बनावटी मुस्काने,बनावटी मन्दिर मस्जिद की अजाने
श्रध्दा छुप हुई असत्य की गोद में भगवान भी कैसे सुने फ़रियाद
जिंदाबाद -जिंदाबाद.......
★
आदरणीय ऋतु आसूजा
मिलावट का सच ...
सौ प्रतिशत सच का ,
मिलावटी सच
पक्के वादों का,
मिलावटी सच
दुग्ध में जल या जल में दुग्ध
मिलावट का अदृश्य सच
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आदरणीय सुशील सर
कुछ भी
चलेगा
होनी चाहिये
मगर
कुछ ना कुछ
शुद्ध
बिना मिलावट
की
कोई भी
आसपास की
रद्दी
की
टोकरी
में
फेंकी गयी
चलेगा
होनी चाहिये
मगर
कुछ ना कुछ
शुद्ध
बिना मिलावट
की
कोई भी
आसपास की
रद्दी
की
टोकरी
में
फेंकी गयी
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आज का यह आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की
प्रतीक्षा रहती है।
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जानने के लिए कल का
अंक पढ़ना न भूलें।
#श्वेता
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