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शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

1470...अपना ही लद्दाख है, अपना ही कशमीर।

स्नेहिल नमस्कार
-----
कारगिल दिवस

 भारतीय सैनिकों की शौर्यगाथा से जुड़ा 
एक अविस्मरणीय दिन है।
60 दिन तक चले भारत-पाक युद्ध का अंत
26 जुलाई 1999 को हुआ।
कारगिल में शहीद हुये
सैनिकों के सम्मान और विजयोपहार
को याद करने के लिए यह दिन 
कारगिल दिवस के रुप में 
घोषित किया गया।
वैसे तो हम देशवासियों का 
हर दिन हर पल 
इन वीर जवानों का कर्ज़दार है।
सैनिकों के त्याग और बलिदान 
के बल पर हम अपनी सीमाओं में सुरक्षित
जाति-धर्म पर गर्व करते हुये
सौ मुद्दों पर आपस में माथा फुटौव्वल करते रहते हैं।
अपने देश में अपनी सुविधा में उपलब्ध चारदीवारी में  
चैन की नींद सो पाते हैं
तो बस हमारे सीमा प्रहरियों की वजह से।
 सिर्फ़ दिन विशेष ही नहीं
अपितु हर दिन एक बार 
हमारे वीर जवानों का उनके कर्तव्य के नाम पर किये गये बहुमूल्य बलिदानों के लिए हृदय से हमें धन्यवाद 
अवश्य करना चाहिये।
तो चलिए पढ़ते हैं कुछ रचनाएँ
जो विशेषतः आज के दिन के लिए
शब्दबद्ध की गयी हैंं-
★★★★★★
आदरणीय रुपचंद्र शास्त्री जी
कारगिल विजय दिवस

सैन्य ठिकाने जब हुए, दुश्मन के बरबाद।
करगिल की निन्यानबे, हमें दिलाता याद।
--
अपना ही लद्दाख है, अपना ही कशमीर।
कभी न देंगे पाक को, हम अपनी जागीर।।


★★★★★★

आदरणीय विश्वमोहन जी
कारगिल की यही कहानी

स्वयं काली ने खप्पर लेकर,
चामुंडा संग हुंकार किया।
रक्तबीजों को चाट चाटकर,
पाकिस्तान संहार किया।

'द्रास', 'बटालिक' बेंधा हमने
'तोलोलिंग' का पता लिया।
मारुत-नंदन 'नचिकेता' ने
यम का परिचय बता दिया।


आदरणीया कुसुम जी
कारगिल विजय

राहें विकट,हौसले बुलंद थे,
चीरते सागर का सीना
पांव पर्वतों पर थे,
आंधी तुम तूफान तुम
राष्ट्र की पतवार तुम।

हो शान देश की
मशाल तुम ,मिशाल तुम।

★★★★★★
आदरणीया अनिता सैनी जी
कारगिल पर था तिरंगा लहराया

हर आहट पर सिहर उठे मन,
 फिर तू यादों में उमड़ आया,
लहराया तिरंगा  जिस शान से, 
वह दृश्य फिर आँखों में उभर आया |
क़ुर्बानी  पर क़ुर्बत यह जन्म,
चौखट पर तेरा चेहरा  नज़र आया ,
शौर्य  को  संभाला दिल ने ,
साँसों में वही जूनून उभर आया |
★★★★★★★
आदरणीय रवींद्र जी

जब पींगें बढ़ी मित्रता की 
था फरवरी महीना,
पाकिस्तानी सेना को रास न आया 
दो मुल्कों का अमन से जीना। 

उधर धीरे-धीरे रच डाला  
साज़िश मक्कारी का खेल, 
साबित किया पाकिस्तान ने 
मुमकिन नहीं केर-बेर का मेल।

★★★★★★
आदरणीया अनुुुराधा जी

गोली,बम,धमाकों की आवाज़ से 
कारगिल की चोटी गूँज उठी
वीरों के लहु से लहुलुहान हो
भारत माता सिसक उठी
वीर अड़े रहे और लड़ते रहे
पाकिस्तान को हराकर रुके
दुश्मनों को मार गिराया

★★★★★★
आदरणीया अभिलाषा जी

मातृभूमि के दीवानों ने,
प्राण अपने वार दिए,
विजय का हार लिए,
तिरंगे के मान रखा !
कारगिल पर पांव रखा !
देश की करके रक्षा,
पूरी कर ली अपनी इच्छा,
बहनों की नम आंखें हुईं,
मां-बाप की खुशियां खोईं,

★★★★★★

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कैसा लगा
कृपया अपनी बहुमूल्य
प्रतिक्रियाओं के द्वारा अपने विचार अवश्य रखें।

हमक़दम का विषय है

कल का अंक पढ़ना न भूलेंं
कल आ रही हैं विभा दी अपनी विशेष
प्रस्तुति के साथ

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