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बुधवार, 22 मई 2019

1405..ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे ..


।।प्रातः वंदन।।
यक़ीन चाँद पे सूरज में ऐतबार भी रख
मगर निगाह में थोड़ा सा इंतिज़ार भी रख

निदा फ़ाज़ली

इस अश'आर का 23 मई से कोई सम्बन्ध है? 
अब नजर डालें लिंकों पर..✍
💠💠



ब्लॉग काव्य-धरा की प्रस्तुति..




गर चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे
 क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे



 जायस से वो हिन्दी की दरिया जो बह के आई
मोड़ोगे उसकी धारा या नीर बदल दोगे..

💠💠

ब्लॉग नयी उड़ान से ..वह नहीं गया ,रह गया था


जाने वाले ने तो कहा था
नहीं रुक पायेगा
उसे अब जाना ही होगा



अब अगर रुक गया
जा  नहीं पाऊँगा कभी
शाम भी हो रही है
जाना ही होगा उसे
अँधेरा गहराने से पहले ही...


और वे कहते हैं 
'अब सब उनके सम्मान में एक मिनट का मौन धारण करेंगे'
एक मिनट का मौन 
न जाने क्यों कई सारी आवाज़ें इस एक मिनट के मौन में ही सुनाई देने लगती हैं 
जैसे अर्सों से खड़ी थीं प्रतीक्षारत 
क़तारों में लगी कान दिए 
कि कोई अदृश्य ढाल दरक जाए..

💠💠



पूर्णिमा गयी,बीते दिन दो
चाँद आज भी पुरे शबाब पर था
सागर तट पर चाँदनी का मेला
यूं तो चारों और फैला नीरव
पर सागर में था घोर प्रभंजन
लहरें द्रुत गति से द्विगुणीत वेग से
ऊपर की तरफ झपटती बढ़ती
ज्यो चंन्द्रमा से मिलने..

💠💠

ब्लॉग विश्वमोहन उवाच की रचना के साथ मैं थमती हूँ, कल फिर नई लिंकों के साथ ..




तथागत यशोधरा के द्वार पधारते हैं और उन्हें बोधिसत्व की ज्ञान आभा से ज्योतित कर अपनी करुणा से सराबोर करते हैं:-

   प्रीता प्राणों के पण में,
       राजे चंदा का संजीवन/
       बोधिसत्व पावन सुरभि, 
       महके तेरा तन-मन हर क्षण/
       तू चहके प्रति पल चिरंतन

💠💠

जाते जाते कल के नतीजों के लिए शेर..
मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है
आईना देखिएगा ज़रा देख-भाल के
                          - अमीर मीनाई
💠💠
हम-क़दम का नया विषय
💠💠
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'…✍
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