सादर अभिवादन।
है
धूप
तपन
प्यासे प्राणी
ठहरी हवा
गुमसुम पंछी
खिला गुलमोहर।
हैं
पंछी
पथिक
थके-हारे
छाया घनेरी
हवा से हिलते
कोमल किसलय।
-रवीन्द्र
आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-

ई- टेंडर ने
कर दिया,
टेंडर फिक्सिंग
गोल।
'बेंच-फिक्सिंग'
रह गया
बिन तोल के
मोल।

कभी सूरज ने
झुलसाया तन-मन
जला डाला निवाला
लू के थपेड़ों में चपेट
भूख-प्यास ने मार डाला
समझ न पाए
क्यों जमाना
इतना क्रूर!
सबके करीब
सबसे दूर
मजदूर!

गली मुहल्ले शहरों को
क्लीन सिटी बनाते
गटर साफ करते,कड़कती धूप में
सड़कों पर चारकोल उड़ेलते,
कल कारखानों में हड्डियाँ गलाते
संकरे पाताल खदानों में
जान हथेलियों पर लिए
अनवरत काम करते मज़दूर

मैंने कोई क़सम नहीं खाई बस ट्रांजिस्टर उनके सामने रख दिया. हिंदी समाचार चल रहे थे राजनारायण का जीवन परिचय चल रहा था और यह बताया जा रहा था कि विश्व इतिहास में एम. पी. का चुनाव हारने वाली पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी हैं.

बात उन दिनों की है जब मैं छठी कक्षा में पढती थी । हम एक संयुक्त परिवार में रहते थे । स्कूल के लिए हमें घर से टिफिन मिलता था जिसमें पराँठा और अचार मिलता था रोज ही । हमारे स्कूल के अंदर एक चाट के ठेले वाला भी आया करता था ,जो समोसे ,पापड़ी चाट लाता था ,चवन्नी मेंं मिलती थी एक प्लेट । बहुत सी लडकियां खाने की छुट्टी में ठेले के इर्दगिर्द खडी होकर मजे ले कर खाया करती थी ।मन तो हमारा भी बहुत करता था ,पर हमें तो बस पराठे आचार से ही संतोष करना पडता था ।
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
यहाँ देखिए
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरुवार।
रवीन्द्र सिंह यादव