सादर अभिवादन।
जी हाँ आज शुक्रवार ही है।
दिन अदला-बदली
सुहानी धूप खिली।
प्रकाश पर्व की शुभकामनाऐं।
सिख धर्म के संस्थापक व 10 सिख गुरुओं में प्रथम गुरुनानक देव जी की 550 वीं जयंती आज देश-दुनिया में धूमधाम से मनायी जा रही है।
1469 में कार्तिक मास की पूर्णमासी को गुरुनानक देव जी का जन्म लाहौर से 65 किलोमीटर दूर तलवंडी में हुआ था।

प्रकाश पर्व की शुभकामनाऐं।
सिख धर्म के संस्थापक व 10 सिख गुरुओं में प्रथम गुरुनानक देव जी की 550 वीं जयंती आज देश-दुनिया में धूमधाम से मनायी जा रही है।
1469 में कार्तिक मास की पूर्णमासी को गुरुनानक देव जी का जन्म लाहौर से 65 किलोमीटर दूर तलवंडी में हुआ था।

मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।
नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥
आइये अब आपको आज की पसंदीदा
रचनाओं की ओर ले चलें -
पता ही नहीं चलता है कि बिकवा कोई और रहा है कुछ अपना और गालियाँ मैं खा रहा हूँ....डॉ.सुशील कुमार जोशी
लोग
मुस्कुराहट
के साथ मिलते हैं
बताते भी नहीं है
कि खुद की नहीं
किसी और की
दुकान चला रहा हूँ
रचनाओं की ओर ले चलें -
पता ही नहीं चलता है कि बिकवा कोई और रहा है कुछ अपना और गालियाँ मैं खा रहा हूँ....डॉ.सुशील कुमार जोशी
लोग
मुस्कुराहट
के साथ मिलते हैं
बताते भी नहीं है
कि खुद की नहीं
किसी और की
दुकान चला रहा हूँ

एक सूखा पात अटका है वहाँ ,
गुलमोहर के पेड़ की उस शाख पर ,
जो धधकता था सिंदूरी रंग में ,
अस्त होती सूर्य किरणों से कभी !

मैं समर्थ मन मतवाला हूँ
बिना पंख के परवान चढ़ूँ
अरि के मद का दोहन कर दूँ
नीले नभ परवाज़ भरूं !

गर्मी की लूँ सी हवाएँ बांस के झुण्डों से ।
सीटी सी सरगोशी लिए बहा करती थी ।।
हरीतिमा से ढका एक छोटा सा घर ।
मोगरे , चमेली और गुलाबों सा महकता था ।।

वो छोड़कर जबसे गये हमको तन्हा
बेचैन, छटपटाती पगलाई पछुआ है
लगा श्वेत,कभी धानी,कभी सुर्ख़,
रंग तेरी चाहत का मगर गेरुआ है

शालीनता की मूरत ,
ऐसी रही,
आस्था की सूरत.... ....
समय की मार से
अपनों के प्रहार ने !!
जल रही द्वेष की दावाग्नि में !!
दोगले स्वार्थ ने
अपना शिकार बनाया !!
चलते-चलते आदरणीय राही जी की विशेष प्रस्तुति पर -

हम-क़दम के
छियालीसवें क़दम का विषय यहाँ
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
रवीन्द्र सिंह यादव