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बुधवार, 3 जून 2026

4762..देखा जाए तो...

।।प्रातःवंदन।।

" पंथ पर चलना तुझे तो मुस्कुराकर चल मुसाफिर!

वह मुसाफिर क्या जिसे कुछ शूल ही पथ के थका दें?

हौसला वह क्या जिसे कुछ मुश्किलें पीछे हटा दें?

जिन्दगी की राह पर केवल वही पंथी सफल है,

आँधियों में, बिजलियों में जो रहे अविचल मुसाफिर!

पंथ पर चलना तुझे तो..."

गोपालदास नीरज

इसी वैचारिक रूप को संजोए चलते हैं बुधवारिय प्रस्तुतिकरण पर..

पुरुषार्थ के पथ पर..


 निकट भविष्य के श्रम-संघर्ष से,

तुम बिल्कुल ही अनजान हो।

या स्वयं को समझो पूर्ण समर्थ,

या चंद दिवस के मेहमान हो।

भूतकाल का अनुभव पथदर्शक,

वर्तमान कठिन या आसान हो।

मगर भविष्य कब ठहरा है,..

✨️

दो जून की या छह जून की...कौन सी रोटी है अच्छी!!

आज दो जून है तो सुबह से शाम तक सोशल मीडिया में ‘दो जून की रोटी’ छाई हुई है। हर कोई दो जून की रोटी का महत्व/संघर्ष गिनवा रहा है लेकिन मेरी समस्या यह है कि बदलते वक्त में किसे सही माने.. दो जून की रोटी को या छह जून की रोटी को। अब आप सोच रहे होंगे कि दो जून तो ठीक है पर ये छह जून क्या बला है?..

✨️

देखा जाए तो.............

देखा जाए तो 

बातें वही हैं 

हम सबकी 

जिन्हें कोई एक कहता है 

दूसरा भी 

अपने शब्द देकर  

सिर्फ दोहराता है। 

देखा जाए तो ..

✨️

फूलों की चाह है तो काँटों को चुनना होगा 

उड़ने की चाह है तो पंखों को खुलना होगा ..

✨️

बिगाड़ के डर से--- 

एकता व्यास की कहानी ‘स्लीपिंग पार्टनर’ 

यह कहानी अपने शीर्षक के कारण प्रथम दृष्टया पाठक को एक ऐसे भ्रम में डालती है, मानो यह किसी यौन सम्बन्ध अथवा देहात्मक निकटता की कथा हो। किंतु कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यह स्पष्ट होता जाता है कि लेखिका का सरोकार शरीर से अधिक उस गहरे अकेलेपन से है, जो आधुनिक जीवन-शैली और बदलते पारिवारिक ढाँचों ने बुज़ुर्गों के हिस्से में छोड़ दिया है। यही इस कहानी की सबसे बड़ी सफलता भी है कि वह एक भ्रामक शीर्षक के भीतर अत्यंत मार्मिक मानवीय संवेदना को छिपाकर रखती है।..

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

2 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ बनने की चाह है तो सपनों को बुनना होगा !
    बेहतरीन अंक
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन अंक 🙏 आज के इस बेहतरीन अंक में मेरी रचना को शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार और धन्यवाद जी

    जवाब देंहटाएं

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