"भोर का बावरा अहेरी!
पहले बिछाता है आलोक की
लाल-लाल कनियाँ,
पर जब खींचता है जाल को
बाँध लेता है सभी को साथ..!!"
अज्ञेय
जीवन की आपाधापी के बीच कुछ पल बिताइए शब्दों की दुनिया में जब बात हो खास अंदाज में..
कब और कैसे खत्म होगा ‘शह और मात’ का खेल?
पश्चिम एशिया में पहले से इस बात का इमकान था कि लड़ाई शुरू होने वाली है, पर आज कहना मुश्किल है कि वह कब और कैसे खत्म होगी. चौतरफा बयानबाज़ी से लगता है कि वह आसानी से तो खत्म नहीं होगी..
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कल बाजार वो मुर्दों का श्मशान सटोरियों को नीलामी बेच आया l
मजमा लगा कब्जे का कब्र खोद चिताओं का आसमाँ बेच आया
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किसी की खुशबू बसी है इस रुमाल में
कायनात में किसी की बातें हैं कमाल में
वह दिखे तो और देखने का जी करता है
नहीं देखूं तो आ जाती है वह खयाल में
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हनी, बनी और सागर इन तीन नामों से आप शायद ही परिचित होंगे पर इन्होंने डेढ़ साल पहले जो गीत रचा वो आप सबने जरूर ही गुनगुनाया होगा। जी हां मैं बात कर रहा हूं तू है तो दिल धड़कता है कि जिसका संगीत निर्देशन किया है हनी-बनी की बेहद युवा जोड़ी ने। आवाज़ दी है बनी और सागर ने और लिखा है..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
शानदार अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदन