शीर्षक पंक्ति: आदरणीय दिगंबर नासवा जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं पाँच पसंदीदा चयनित रचनाएँ-
घर जिनके माहताब ने झट से जला दिए ...
मिट्टी कटी किनारों की - राहुल शिवाय
उसी भाव से टाँके तुमने टूटे बटन कमीज के
जैसे मेरी उम्र माँगने करती हो व्रत तीज के।
या
या फिर
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मासिक बाल पत्रिका किलोल में प्रकाशित बाल कविताएं -आकिब जावेद
*****उपन्यास ‘उपेक्षिता’: सामाजिक चेतना का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेजडी.सी. का व्यक्तित्व एक ऐसे आदर्श नायक का है जो अन्याय के समक्ष झुकने के स्थान पर, आँखों में आँखें डालकर सत्य बोलने का साहस रखता है। काजल के हृदय में पश्चाताप की अग्नि प्रज्वलित होना और उसका आत्मघाती कदम उठाना, कथा को एक नया मोड़ देता है। डी.सी. द्वारा अपना रक्त देकर काजल के प्राणों की रक्षा करना इस बात का प्रतीक है कि मानवीय रक्त का संबंध जातीय और वर्गीय दीवारों से कहीं अधिक ऊँचा और पवित्र होता है।*****फिर मिलेंगे। रवीन्द्र सिंह यादव
सुंदर चयन
जवाब देंहटाएंआभार
वंदन
बहुत बहुत शुक्रिया आपका
जवाब देंहटाएंसुप्रभात!! अनुपम प्रस्तुति, आभार!
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रस्तुति
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