सादर अभिवादन
लोगों का बसियाया सा चेहरा
मुझे हारे हुए जुआरी सा लगता है
आज रवींद्र भाई नही है
भूल गए हों शायद
रचनाएं देखें
तुम जैसे...
बंद पलकों की खिड़की पर
डोलता जुगनू,
अंधेरे की उंगली में जड़ा
नीला रत्न,
अथाह जल के बीच
घड़ियाल के पीठ पर बैठकर
उकेरे गये सपने,
अंतिम इच्छा का उत्सव।
लड़कों की जेब में
तितिर-बितिर रखा
लड़कियों की चुन्नी में
करीने से बंधा
दूल्हे की पगड़ी में
कलगी के साथ खुसा
सुहागन की
काली मोतियों के बीच में फंसा
धडकते दिलों का
बीज मंत्र है
एक रात, जब पहरेदार थक जाते हैं
और ताले अपनी चाबियाँ भूल जाते हैं,
धरती के भीतर
एक हल्की-सी खरोंच होती है—
जैसे इतिहास ने करवट ली हो।
वहीं से एक प्रश्न अंकुरित होता है—
बिना अनुमति, बिना आदेश।
इस बात से वह नाराज़ है मुझसे,
उसमें काँटा नहीं, गुलाब देखा मैंने।
न नींद आती है, न चैन पड़ता है,
किस मनहूस घड़ी में गुलाब देखा मैंने?
हाथों की लकीरों सा पाला था जिन्हें,
आज वे ही हाथ अनजानी राहों पर चल पड़े।
जिनकी मुस्कान के लिए बेच दी थी अपनी रातें,
आज वे ही अपनी दुनिया के चकाचौंध में ढल पड़े।
प्रेम
महज एक इन्द्रजाल
एक कुहासा
जिसमें विमुग्ध पथिक
विलुप्त हुआ अपने आप से
खिंचा चला जाता है कहीं दू...र
अनजान ,अपना सब कुछ छिन जाने की ,
एक साजिश से
एक
स्कैम है प्रेम ।
समय बहुत कठिन था
पर उतना भी बुरा नहीं था
कि मैं बच नहीं सकती थी
मुझे तो मेरे ह्रदय के गर्भ में जन्मे
प्रेम ने मार डाला जो तुम्हारे लिए था |
हर एक रंग होता है प्यार ,यार किससे कहें
सभी तो होते हैं तलबगार ,यार किससे कहें
बहारें देख, खिलते हैं मन,और गुल गुलिस्तां मे
सभी होते हैं,बागों मे शुमार ,यार किससे कहें
आज का अंक भी
कुछ भारी हो गया है
सादर वंदन



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