शिवरात्रि माह का सबसे अंधकारपूर्ण दिवस होता है। प्रत्येक माह शिवरात्रि का उत्सव तथा महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना ऐसा लगता है मानो हम अंधकार का उत्सव मना रहे हों। कोई तर्कशील मन अंधकार को नकारते हुए, प्रकाश को सहज भाव से चुनना चाहेगा। परंतु शिव का शाब्दिक अर्थ ही यही है, ‘जो नहीं है’। ‘जो है’, वह अस्तित्व और सृजन है। ‘जो नहीं है’, वह शिव है। ‘जो नहीं है’, उसका अर्थ है, अगर आप अपनी आँखें खोल कर आसपास देखें और आपके पास सूक्ष्म दृष्टि है तो आप बहुत सारी रचना देख सकेंगे। अगर आपकी दृष्टि केवल विशाल वस्तुओं पर जाती है, तो आप देखेंगे कि विशालतम शून्य ही, अस्तित्व की सबसे बड़ी उपस्थिति है। कुछ ऐसे बिंदु, जिन्हें हम आकाशगंगा कहते हैं, वे तो दिखाई देते हैं, परंतु उन्हें थामे रहने वाली विशाल शून्यता सभी लोगों को दिखाई नहीं देती। इस विस्तार, इस असीम रिक्तता को ही शिव कहा जाता है। वर्तमान में, आधुनिक विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि सब कुछ शून्य से ही उपजा है और शून्य में ही विलीन हो जाता है। इसी संदर्भ में शिव यानी विशाल रिक्तता या शून्यता को ही महादेव के रूप में जाना जाता है। इस ग्रह के प्रत्येक धर्म व संस्कृति में, सदा दिव्यता की सर्वव्यापी प्रकृति की बात की जाती रही है। यदि हम इसे देखें, तो ऐसी एकमात्र चीज़ जो सही मायनों में सर्वव्यापी हो सकती है, ऐसी वस्तु जो हर स्थान पर उपस्थित हो सकती है, वह केवल अंधकार, शून्यता या रिक्तता ही है। सामान्यतः, जब लोग अपना कल्याण चाहते हैं, तो हम उस दिव्य को प्रकाश के रूप में दर्शाते हैं। जब लोग अपने कल्याण से ऊपर उठ कर, अपने जीवन से परे जाने पर, विलीन होने पर ध्यान देते हैं और उनकी उपासना और साधना का उद्देश्य विलयन ही हो, तो हम सदा उनके लिए दिव्यता को अंधकार के रूप में परिभाषित करते हैं।
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हृदय में पीड़ा अपार है
खुशियों की जगह घृणा ने ली है
चाहत पर भारी नफरत की सवारी
विश्वास ही रिश्ते की डोर है
इन सबको समझाऊं मै कैसे
अपने अंदर छुपे हुए ग्रंथि का आविष्कार करें,
प्रतिबिंबित परिभाषा को दिल से स्वीकार करें,
न तुम हो पारसमणि न मैं कोई शापित पाषाण,
दर्पण को रख सर्वोपरि आपस में व्यवहार करें,
मंच से अट्टहास करता विधर्मी
देखा गया अक्सर
जबकि ईमानदार लोग रहते हैं
सहमे खड़े होते हैं
हाशिये पर !
कुछ हुआ है
ख़्वाब दिन में
ही हमें आने लगे हैं ,
पेड़ पर
बैठे परिन्दे
जोर से गाने लगे हैं ,
सुरमई
सी शाम
अब कुछ देर से ढलने लगी है |
स्वाद में खट्टे मीठे संतरा (Orange) से तो सभी परिचित होंगे और सब को यह पसंद भी बहुत होगा। संतरा (Orange) बहुत रसदार फल है, जो विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, कोलिन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर है। संतरा (Orange) एक लोकप्रिय फल है जिसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। अपनी इच्छा अनुसार कोई इसे छीलकर सीधे खाना पसंद करता है तो कोई इसके जूस निकालकर पीता है। आमतौर पर सभी लोग यह जानते हैं कि संतरा (नारंगी) का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, परंतु कम लोगों को ही यह पता होगा कि संतरा (नारंगी) का इस्तेमाल एक औषधि के रूप में भी किया जाता है।
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पम्मी जी आज प्रयागराज में है
सोचकर कि ये स्नान इस कुम्भ का अंतिम स्नान है
जाते बिराते कुछ और पुण्य एकत्रित कर लिया जाए
शुभकामनाएं उनको
सादर वंदन
बहुत अच्छा सफर रहा..वर्ना फूलो की बारिश कौन करता है. सुंदर,सफल मैनेजमेंट.
जवाब देंहटाएंहर हर महादेव ।
बाखूब आज की पेशकश। सभी रचनाकारो को बधाई।