निवेदन।


फ़ॉलोअर

शनिवार, 23 नवंबर 2019

1590... मुखौटा


सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

कब कौन कितना किसको
अपना निशाना बना रहा
कंधे इतने मजबूत नहीं
बंदूक रखने के पहले तौल तो लेते
उतना ही बोलना जितना जरूरी हो
सीखने में एक उम्र गुजर गई
ना जाने कब पीछा छोड़ेगा दो चित्तापन
और जाने कब उतरा जा सकेगा

फैल जाता है
जीवन का खालीपन
और गहराता है
लोग सांत्वना के
दो बोल बोलते हैं
और हार का एहसास

मन ही मन में हैं गारियाँ देतें
पर ऊपर से मुस्कुराते हैं
रखते दिल के अंदर खोट ही खोट
और सिर्फ झूठा प्यार जताते हैं
यहाँ सब दिखते हैं तो गहरे गहरे पर
ये मुखौटे कोई उतार नहीं पाते हैं
राम राम मुख से हैं सब जपते
और रावण बन पीठ में खंजर घोप जाते हैं

जिसका चेहरा जितना बनावटी
वह उतना ही सफल है
छल प्रपंच से भरे खेल में
उसकी दांव प्रबल है 
अपनापन का भाव कहाँ यहाँ पर
केवल स्वार्थ निहित है

मुखौटे

रामलीला में अगर कुंभकर्ण का मुखौटा है तो वह कुंभकर्ण का ही पात्र है।
जीवन में यह द्वैत है। अगर जीवन पर रंगमंच खेला जाए तो
फिर से मुखौटे लगाने होंगे जो वास्तविक चेहरे से भिन्न होंगे,
क्योंकि रंगमंच में तो सच दिखाना है। इसलिए
आधुनिक रंगमंच में कई भावों को प्रस्तुत करने के लिए मुखौटे लगते हैं।

दो चेहरे

देखते हैं आयना तो पहला चेहरा नजर आता है,
और दूसरा तो बस आंखे बंद करने पर दिख जाता है।
जिन बुराइयों को छिपाता है तू जमाने से,
उन्हें दूसरा चेहरा ही तुझे दिखाता है।
फिर भी न जाने क्यों ?
तुझे पहला चेहरा ही भाता है।

><
फिर मिलेंगे

इस सप्ताह का विषय
छियानबेवां विषय

बिटिया
उदाहरण
आज भी तो नवजात बिटिया के 
जन्म पर,भविष्य के भार से 
काँपते कंधों को संयत करते
कृत्रिम मुस्कान से सजे अधरों और
सिलवट भरे माथे का विरोधाभास लिये
"आजकल बेटियाँ भी कम कहाँ है"
जैसे शब्दांडबर सांत्वना की थपकी देते
माँ-बाबू पर दया दृष्टि डालते परिजन की
"लक्ष्मी आई है"के घोष में दबी फुसफुसाहटें
खोखली खुशियाँ अक्सर पूछती हैं
बेटियों के लिए सोच ज़माने ने कब बदली?
कलमकारः सखी श्वेता सिन्हा

अंतिम तिथिः 23 नवम्बर 2013
प्रकाशन तिथिः 25 नवम्बर 2013

प्रविष्ठिया मेल द्वारा सांय 3 बजे तक

15 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन प्रस्तुति
    सदा की तरह सदाबहार..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह दी जबरदस्त विषय और एक से बढ़कर एक रचना आनंद आ गया पढ़कर।
    बेहतरीन प्रस्तुति सराहनीय सूत्रों के साथ सदा की भाँति।

    जवाब देंहटाएं
  3. बेहतरीन प्रस्तुति आनंद आ गया

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहद सुन्दर लेख है ।

    https://shaayridilse.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  7. क्या गजब का लिखा है बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।

    http://govnaukri.info/

    जवाब देंहटाएं
  8. बेहद उम्दा रचनाएं. हिंदी भाषा में एक और बेहतरीन ब्लॉग. धन्यवाद....

    ये भी पढ़ें Dr. APJ Abdul Kalam Quotes in Hindi

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...