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गुरुवार, 7 नवंबर 2019

1574... रूप,रंग के चक्कर में मन की सुंदरता भूल गये ...


सादर अभिवादन। 

क्लांत और निष्प्रभ शाम 
किसको सुहाती है भला,
पंछियों का हो कलरव 
और अभिसार न हो टला। 
-रवीन्द्र    


आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें- 

जेन्नी  शबनम
किसी ऋषि ने लिख दिया था कि   
कभी कोई दुष्यंत सब विस्मृत कर दे तो   
शंकुतला यहाँ आकर सारा अतीत याद दिलाए   
पर अब कोई स्रोत शेष रहा   
जो जीवन को वापस बुलाए   
कौन किसे अब क्या याद दिलाए !   


Kavita Rawat 

मेरा ईमान भी अब बुझी हुई राख की तरह है
जिसमें कभी आंच और चिंगारियाँ होती

कुछ कम पढ़े तो कुछ अधिक ही पढ़ गए हम
वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती
 


My photo

सुना है, जांच होगी।
झूठ होगी, साँच होगी।।
पंचों की पंचाट होगी।
न्याय की बंदरबाँट होगी।।
चैन के रैन-बसेरे होंगे।
सुलह के सबेरे होंगे।।
कुछ 'तेरे' कुछ 'मेरे' होंगे।
चोर-चोर मौसेरे होंगे।।




 My photo

ढाँचा है कि गिरने वाला है
और ताक रहें हैं सब मुझे,
खिलखिलाते हुए
सांचे हाथ में लिए हुए
भूल चुके हैं शिल्पकारी
जब याद आएगी
चुकी होगी बारी इनकी
फिर कोई हंसेगा, खिलखिलायेगा
बग़ल में खाली साँचा हाथ लिए




 

शब्दों का प्रभाव क्या होता है 
ख़ाकी और काले-कोट को 
अँगुली पर नचा रहे थे 
नासपीटे धरने पर बैठ गये 
पहले काला-कोट अब यह ख़ाकी  
परिवार सहित सड़क पर जाम लगाये बैठे हैं  
बुद्धि भिनभिना रही है हमारी 
यह होश  में कैसे रहे हैं



 

वो टुकड़ा बादल का,
      वो नन्हीं-सी धूप सुनहरी,
       वो आँगन गीला-सा
       हर अल्फ़ाज़ यहाँ पीले हैं।
       तलाशती फिर रही हूँ..
       शायद कोई तो कोना रिक्त होगा...

और चलते-चलते पेश है आँचल पाण्डेय जी की सस्वर बाल कविता जो निस्संदेह आपका मन मोह लेगी-




https://youtu.be/8dHlAVU4G1E
कौआ जी और तोता जी

करो क्षमा हे कौआ भइया जी 
हम तो कितने नादान रहे 
रूप,रंग के चक्कर में 
मन की सुंदरता भूल गये 
तो हँस कर बोले कौआ जी 
भूलिए भूल को भइया जी 
अब प्रेम से दोनों गले लगें
और आसमान में फूर्र उड़े 


हम-क़दम का नया विषय


आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव 



11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आभार आपका..
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  2. लाजवाब प्रस्तुति
    एक सोसिअल साइट पर, सोसिअल मंच पर लगनी वाली रचनाओं का कमाल का संकलन।
    कुछ समसामयिक, कुछ सामाजिक मुद्दों पर चिंता प्रकट करती और कुछ सार्थक सन्देश देती रचनाओं से अवगत कराने का आभार।
    आपकी साहित्यिक नज़र को सलाम। 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह!!बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ,आज मेरा लम्बे समय बाद यहाँ आना सार्थक हुआ ।

    जवाब देंहटाएं
  4. खूबसूरत प्रस्तुति.. सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवम् शुभकामनाएँँ।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहतरीन प्रस्तुति ,सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  7. सभी आदरणीय जनों को सादर नमन 🙏
    अंक के आरंभ में ही निरंतर बढ़ते रहने का शुभ संदेश देती आपकी पंक्तियों के संग आपकी प्रस्तुति लाजावाब है आदरणीय सर और सभी चयनित रचनाएँ भी बेहद उम्दा। रचनाकारों को खूब बधाई।
    मेरे यूट्यूब लिंक के संग मेरी रचना को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार।
    शुभ संध्या 🙏

    जवाब देंहटाएं
  8. सुंदर प्रस्तुति। आभार और बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत ही सुन्दर हलचल प्रस्तुति.
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई.मुझे स्थान देने के लिये तहे दिल से आभार आदरणीय.
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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