पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

सोमवार, 23 जनवरी 2017

556.....आचार संहिता है हमेशा नहीं रहती है कुछ दिन के लिये मायके आती है

सादर अभिवादन.
.....शत-शत नमन.....
भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास के 
महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस का 
जीवन और उनकी मौत दोनों ही रहस्यमयी रहे. 
नेताजी का जन्म आज ही के दिन हुआ था.
वह एक सैनिक और कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं. 
उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को  कटक, उड़ीसा प्रांत में हुआ. 
बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में 
पश्चिमी शक्तियों का मुकाबला 
आजाद हिंद फौज बना कर किया.... 
उनका एक मुख्य नारा था"तुम मुझे खून दो..मैं तुम्हें आजादी दूँगा"

चलिए चलते हैं आज के अंक की ओर..

दादी अम्मा को गुज़रे अरसा हुआ. बड़े अब्बू के बड़े बेटे के घर रूमान हो गया। पर राज़ की बात बताऊँ........ हमारी नस्ल में  " राजा " नाम उसी को मिला जो घर का पहला बच्चा था यानि  दादी की सबसे पहली पोती, मेरी सबसे बड़ी बहिन ,  जो मेरे सर पर बैठ ऊंचे सुरों में गुनगुना  रही है , " तुम भी पहले पहल , हम भी पहले पहल ........."  

स्त्री!!
तुम देह हो
आत्मा भी
और तुमने सिखा है जीना
देह और आत्मा दोनों को

चाँद वाली रौशनी में आसमाँ की बात कर
ऐ मुहब्बत अब सितारों के जहाँ की बात कर

मुफलिसी में भी रहे आबाद रिश्तों का जहाँ
हो मुरव्वत हर किसी से उस मकाँ की बात कर

जानती हूँ , इस प्राप्त वृहद युग में
कैसे बहुत छोटा- सा जीवन जीती हूँ
रस तो अक्ष है, अद्भुत है , अनंत है
पर अंजुरी भर भी कहाँ पीती हूँ ?

सबको ज़ख्म दिखाने निकले 
हम भी क्या बेगाने निकले 
पहले क़त्ल किया यारों ने 
पीछे दीप जलाने निकले 

बहुत शाँति का 
अहसास “उल्लूक” 
को होता है हमेशा ही 
ऐसी ही कुछ 
बेवजह हरकतों 
पर किसी की 
उसकी बाँछे 
पता नहीं क्यों 
खिल जाती हैं 
आने वाले एक 
तूफान का संदेश 
जरूर देते हैं 

आज्ञा दें दिग्विजय को
सादर








7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    शानदार विविध रचनाओं का संगम
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. हलचल की बहुत सुंदर प्रस्तुति । धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. आचार संहिता है हमेशा नहीं रहती है कुछ दिन के लिये मायके आती है लेकिन धमाल मचा के फिर ५ साल के लिए ससुराल में ही छुप जाती हैं ,,, हां हां ..सही कहा
    बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर प्रस्तुति आभार आपका धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर प्रस्तुति । एक हफ्ता बाहर रहा नहीं आ पाया । आभारी हूँ दिग्विजय जी 'उलूक' के एक पुराने पन्ने की धूल हटाने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर हलचल!रचना शामिल करने हेतु धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...