सादर अभिवादन.
.....शत-शत नमन.....
भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास के
महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस का
जीवन और उनकी मौत दोनों ही रहस्यमयी रहे.
नेताजी का जन्म आज ही के दिन हुआ था.
वह एक सैनिक और कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं.
उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, उड़ीसा प्रांत में हुआ.
बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में
पश्चिमी शक्तियों का मुकाबला
आजाद हिंद फौज बना कर किया....
उनका एक मुख्य नारा था"तुम मुझे खून दो..मैं तुम्हें आजादी दूँगा"
चलिए चलते हैं आज के अंक की ओर..
दादी अम्मा को गुज़रे अरसा हुआ. बड़े अब्बू के बड़े बेटे के घर रूमान हो गया। पर राज़ की बात बताऊँ........ हमारी नस्ल में " राजा " नाम उसी को मिला जो घर का पहला बच्चा था यानि दादी की सबसे पहली पोती, मेरी सबसे बड़ी बहिन , जो मेरे सर पर बैठ ऊंचे सुरों में गुनगुना रही है , " तुम भी पहले पहल , हम भी पहले पहल ........."

स्त्री!!
तुम देह हो
आत्मा भी
और तुमने सिखा है जीना
देह और आत्मा दोनों को
चाँद वाली रौशनी में आसमाँ की बात कर
ऐ मुहब्बत अब सितारों के जहाँ की बात कर
मुफलिसी में भी रहे आबाद रिश्तों का जहाँ
हो मुरव्वत हर किसी से उस मकाँ की बात कर
जानती हूँ , इस प्राप्त वृहद युग में
कैसे बहुत छोटा- सा जीवन जीती हूँ
रस तो अक्ष है, अद्भुत है , अनंत है
पर अंजुरी भर भी कहाँ पीती हूँ ?
सबको ज़ख्म दिखाने निकले
हम भी क्या बेगाने निकले
पहले क़त्ल किया यारों ने
पीछे दीप जलाने निकले
बहुत शाँति का
अहसास “उल्लूक”
को होता है हमेशा ही
ऐसी ही कुछ
बेवजह हरकतों
पर किसी की
उसकी बाँछे
पता नहीं क्यों
खिल जाती हैं
आने वाले एक
तूफान का संदेश
जरूर देते हैं
आज्ञा दें दिग्विजय को
सादर
सादर





