निवेदन।


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मंगलवार, 12 मई 2026

4740...उसका घर उसका देश है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय ओंकार जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

मंगलवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-

कौन हो तुम-एक दार्शनिक प्रेम कविता

स्वयं के अस्तित्व से बेखबर
दुर्गम पथ की बाधाओं से अनजान,
कठोर धरातल पर कुसुम-राह तलाशती।
जीवन के इस विस्तृत क्षितिज को
अदम्य उत्साह और चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!

*****

माँ की प्रतिक्षाएँ

कोई पूछे

आज तुमने क्या खाया?”

जैसे वह बरसों पूछती रही है सबसे।

वह प्रतीक्षा करती है

कि बच्चे जब सफल हों

तो परिचय में सिर्फ़ पिता का नाम नहीं,

उसकी जागी रातें भी दिखाई दें।

*****

855. माँ

उसका घर उसका देश है,

देहरी देश की सीमा,

बच्चे देश के नागरिक,

उसके होने भर से

महफ़ूज़ रहता है उसका देश,

चैन से सोते हैं उसके बच्चे।

*****

सोशल मीडिया में मैडिटेशन का शोर

आज की दुनिया में, जहाँ लोग देर रात तक स्क्रीन देखते हैं और फिर नींद न आने की शिकायत करते हैं, यह विधि तेज़ी से प्रचलित हो रही है। अनिद्रा कुछ हद तक घटती है और नींद आ जाए तो चिंता भी कम हो जाती है। इस अभ्यास से शरीर और मन को आराम मिलता है। लेकिन इसका उद्देश्य सिर्फ़ नींद लाना है, आत्म-दर्शन नहीं। आराम और गहरी ध्यान-साधना के बीच का अंतर समझना ज़रूरी है।

 *****

मातृदिवस, दस मई को ही क्यों

माँ ! जैसे विशाल, अद्वितीय, अप्रतिम, दैवीय व्यक्तित्व के लिए एक दिन का निर्धारण ! इस बात को लेकर कई बार हम भावुक और आक्रोशित भी हो जाते हैं ! पर मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाने के पीछे भी एक बेटी की अपनी माँ के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और सामाजिक सुधार की भावना काम कर रही थी ! उस बेटी का नाम है, एना मारिया जार्विस ! एना की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था, इसीलिए मई के दूसरे रविवार को ही ''मदर्स डे'' मनाने की परंपरा शुरू हुई!

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 


सोमवार, 11 मई 2026

4739 तोहरे बातन में मिठास त बहुत बा लेकिन ......

सादर अभिवादन

मातृ दिवस कल सम्पन्न हुआ
पर रचनाएं हफ्तों आती रहेंगी
और माँ तो ताजिंदगी साथ नहीं छोड़ती है

रचनाएं




तोहरे बातन में मिठास त बहुत बा लेकिन,
कबहूँ-कबहूँ लागेला थोड़ा हिसाबी हौ।

तोहरे हँसी से खिल उठेला जिनगी के मौसम,
छँट गइल अन्हेरा काहे कि रात महताबी हौ।




क्या इस बार भी  
खूबसूरत आभासी गुलदस्ते, 
तरह-तरह के आभासी केक 
और वचना भरे शुभकामना सन्देश
भेज कर मना लोगे तुम
‘मदर्स डे’,
और खुश हो जाओगे  





कोई चाहता है 
हम पूर्ण विकसित हों 
इसलिए वह पाहन, बेड़ियाँ, प्रेम 
सब के साथ पूर्णता की चाह भी 
भर देता है !! 





उस दिन के बाद मणिकर्णिका पर 'कालू' कभी नहीं दिखा। पर लोग कहते हैं अमावस की रात जब कोई अकेला घाट पर रोता है, तो हवा में हल्की सी आवाज़ आती है —

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे...

और रोने वाले को लगता है जैसे किसी ठंडे हाथ ने नहीं, किसी माँ ने उसके सिर पर हाथ रख दिया हो।

कहानी का सार: मंत्र में बिजली नहीं, ममता होती है। पिशाच की सबसे बड़ी प्यास खून नहीं, स्पर्श थी। और जब इंसान डर कर भागने की जगह गले लगा ले, तभी निर्वाण होता है।




आँखों के नम होनें का ,सबब ना पूछो दोस्तों 
यहाँ तो ये किस्सा आम हो गया है
आती हैं खबरें अखबारों में 
एक लाइनों में ,जिंदगी की कीमत 
हो जाती है बयाँ ..... 





“बब्बन भाई, मैं नहीं, आकाश जा रहे हैं.” प्रिया ने आकाश की ओर इशारा करते हुए कहा,
“ये मेरे मित्र हैं, जयपुर से आए हैं. इन्हें विक्रोली में अपनी कंपनी के गेस्ट हाउस जाना है.
आप छोड़कर आइएगा.”

“बिलकुल, दीदी.”

आकाश, प्रिया और आटोरिक्शा चालक के बीच के वार्तालाप को चकित होकर देख रहा था.
उसके विस्मय को देखकर प्रिया ने आकाश को कहा, “आकाश, बब्बन भाई आटोरिक्शा
चालक यूनियन के कार्यकर्ता हैं. ये तुम्हें ठीक गेस्ट हाउस ले जाकर छोड़ेंगे.”

आकाश के चेहरे से विस्मय अब कम नहीं हुआ था. वह प्रिया के व्यक्तित्व के
विस्तार को देखते हुए ही आटोरिक्शा में बैठ गया.


सादर समर्पित
सादर वंदन

रविवार, 10 मई 2026

4738...माँ खुल कर मुस्काई होगी...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया रेणु बाला जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

रविवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-

मातृ दिवस: आस की गूँज

पहला तारा

माँ सिखला रही है

गाँठ खोलना

*****

माँ के लिए दो कविताएँ

जब माँ- बेटी ने मिल कर
कुछ रातें संग बिताई होंगी
जी भर गुरबत कर बेटी से
माँ खुल कर मुस्काई होगी।

*****

धूप और छाँव के बीच

और तब लगता है

दुनिया में उतरना नहीं,

उतरने का अभिनय करना भर ही

अब शेष रह गया है।

*****

माँ 

मेरी चोट का मरहम माँ ही तो है

सबसे प्यारी हमेशा मेरी ही चिंता में घुलने वाली

माँ  देखती हूँ जो तेरा प्यार  मैं  भी  बड़ी बच्ची

तेरी स्नेह  छाँव  में  ही  हर पल  जीवन का गुजारु

अभिलाषा मन की,

*****

भीतरी मोर्चा

19 मई को सुबह आकाश मुंबई पहुँच रहा था. प्रिया ने उसे अपने यहाँ आने को कहा था लेकिन उसने मना कर दिया. आकाश ने मना करते समय जो बात कही थी, उसकी गूंज उसके ज़ेहन से नहीं जा रही थी. "यहाँ तुम अकेली रहती हो. मेरे साथ तुम्हारा ऐसा कोई रिश्ता नहीं जिससे मेरा वहाँ रुकना समाज बर्दाश्त कर सके." फिर भी आकाश के मुंबई आते ही उससे मिलना चाहती थी.

*****

 फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

शनिवार, 9 मई 2026

4737 ...मुल्क का आम जन बहरा है। हो गई पंगु, पन्नों पर लेखनी

 सादर अभिवादन


असीमित शब्दों से भी पूरी
नहीं होती मां की परिभाषा
कई निराशाओं को धूमिल कर देती
मां की एक आशा
बिन कहे, बिन सुने समझ लेती
बच्चों के मन की भाषा

कल अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस है
रचनाएं



मुल्क का आम जन बहरा है।
हो गई पंगु, पन्नों पर लेखनी,
संशय का तम गहरा है।
साफ साफ कह न! सच बोल!
कि स्याही सूख रही,
क्योंकि
कलम पर पहरा है।




ब्रह्मा जी ने ग्यारह हज़ार वर्षों तक ध्यान करने के पश्चात अपनी आँखें खोलीं, तो उन्हें अपने समक्ष एक तेजस्वी पुरुष दिखाई दिया, जिसके हाथ में कथित तौर पर कलम और स्याही की दवात थी। ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने और उसमें गुप्त रूप से स्थित रहने के कारण उस पुरुष को तथाकथित चित्रगुप्त और उनके वंशजों को तथाकथित कायस्थ कहा गया है। इस प्रकार मान्यता है कि कायस्थ जाति की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा रूपी नर के काया से हुई है।




ख़ुद ढूँढ के पीना जो समुंदर की तलब है,
नदिया को नमक डाल के खारा न करो तुम.

अब हो जो गया इश्क़ तो फिर क्या ही करोगे,
पर कर के वही काम दुबारा न करो तुम.




कुलकर्णी जी ने चव्हाण साहब की और देखा. तब खुद चव्हाण साहब बोल पड़े. “ लिटिगेशन कॉस्ट एप्रूव करने का काम आपका है, आप जो भी फरमा देंगे वह यूनियन को मंजूर होगा.”लॉ सेक्रेटरी ने एमडी की और मुखातिब होकर कहा. “मिस्टर एमडी, आप यह कॉस्ट कब तक अदा कर देंगे?”
“सर हम विवाद को शेष नहीं रखना चाहते. हम अभी दस मिनट में चैक आपको सौंप देंगे, 
आप इन्हें तुरन्त दे सकते हैं.” एमडी के चेहरे पर शांति थी, अब वह कुछ राहत महसूस कर रहा था. 
तभी कुलकर्णी जी बोल पड़े.“एमडी साहब, अभी तो ट्रक सिस्टम की समाप्ति और फेयर वेजेज का विवाद इंडस्ट्रियल ट्रिबुनल में शेष है. बेहतर है कि उसे यूनियन से बात करके सैटल कर लें.”
“कुलकर्णी जी, आपकी बात सही है. मिस्टर एमडी, आपको इस पर सोचना चाहिए. मैं कुलकर्णी जी को जानता हूँ. उस मामले में आपको निगोशिएट करने में कोई परेशानी नहीं होगी. सचिव ने सलाह दी.
“जरूर, हम कोशिश करेंगे. यदि आपकी इजाजत हो तो मैं बाहर जाकर अपने असिस्टेंट को चैक बनाने के लिए कह दूँ. बात यहीं खत्म हो तो बेहतर है.” एमडी ने लॉ सेक्रेटरी को कहा. चैम्बर में मौजूद वकील भट्ट सहित सभी मुस्कुरा उठे.






सादर समर्पित
सादर वंदन

शुक्रवार, 8 मई 2026

4736...कुछ कविताओं में जले भात की गंध लौटती है...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सैनी जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

शुक्रवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ-

भात की गंध

कुछ कविताओं में

जले भात की गंध लौटती है,

कुछ में

अधपके दानों की कड़वाहट।

 पर है

धीमे-धीमे देर तक

सबसे अधिक जलता है,

और सबसे कम दर्ज होता है।

*****

आलिंगन

बेमिसाल नादानियाँ तेरी गिली रेत बनाते महल चित्र आकारों की l

अमिट छाप मोहर बन गयी इस शागिर्द के बचपन मुलाक़ातों की ll

तू ही मेरा आसमाँ तू ही चाँदनी इस बंजर पहेली आरज़ू की l

अनछुआ स्पर्श भीगते बारिश तेरी बनाई कागज कश्ती की ll

*****

वेद प्रकाश शर्मा और सुभाष चंद्र बोस

क्रांति दल अंग्रेज़ सरकार के पिट्ठू बने हुए लोगों के पीछे पड़ा रहता है। स्वभावतः वह गगन के पिता के भी पीछे पड़ता है। इधर एक अनजान व्यक्ति जो स्वयं को बिच्छू के नाम से संबोधित करता है, भी गगन के पिता के पीछे पड़ जाता है। गगन स्वयं क्रांति दल में सम्मिलित है। एक दिन अचानक उसकी मुलाक़ात धरा से भी हो जाती है। इधर अंग्रेज़ सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नज़रबंद कर लेती है तथा वे देश से भागकर विदेश जाने की योजना बनाते हैं जिसमें क्रांति दल का सरदार उन्हें सहयोग देता है। देश से बाहर निकलते समय सरदार के कहने से वे गगन और धरा को भी साथ ले जाते हैं। कथानक के अंत में एक ओर तो गगन एवं धरा सुभाष बाबू के साथ-साथ ही विमान-दुर्घटना में फंसकर (सुभाष बाबू को बचाते हुए) शहीद हो जाते हैं जबकि दूसरी ओर संपूर्ण क्रांति दल अंग्रेज़ों के साथ हुई मुठभेड़ में समाप्त हो जाता है।

*****

चले मरुत उनचास... इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है

दरअसल, जल के भीतर जो वायु है उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है।

*****

नाशिक-शिर्डी-औरंगाबाद

हमने कहा-"पुलिस वाले तो मना कर रहें हैं फिर पैसे क्यों..?"आपको जाना है या नहीं "वह बोला।जाना तो था ,साथ में और लोग भी थे ,दे दिए चार सौ रूपए और इस बार पुलिसवालों ने नहीं रोका तब सारा माजरा समझ आ गया। भ्रष्टाचार हमारे जीवन में इस तरह समा गया है कि हर स्तर पर यह ना जाने कितने रूपों में दिखाई देता है।

 *****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 


गुरुवार, 7 मई 2026

4735 ...' जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं। '

 सादर अभिवादन

7 मई ..

आज ही के दिन अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को
अपने आविष्कार का पेटेंट मिला
जिसे उन्होंने टेलीफ़ोन (दूरभाष) का नाम दिया था।


रचनाएं



एमडी ने कुछ कहना चाहा, पर मुख्यमंत्री ने हाथ के इशारे से उसे चुप करा दिया. "मुझे आपके घाटे की बैलेंस शीट में कोई दिलचस्पी नहीं है. मेरी दिलचस्पी अक्टूबर में होने वाले चुनावों में है. अगर ये 350 मजदूर बेरोजगार हुए, तो अंधेरी पूर्व से लेकर आपके इंडस्ट्रियल बेल्ट तक जो आग लगेगी,
उसे बुझाने की ताकत आपमें नहीं है."
मुख्यमंत्री की आवाज़ अब और ठंडी और मारक हो गई. "मैनेजमेंट को तरजीह चाहिए थी, वह मैंने दे दी—सीधे आपको यहाँ बुलाकर. अब फैसला आपका है. या तो यूनियन के साथ बैठकर समझौता कीजिए और दीवाली तक कारखाना चालू रखिए, वरना मैं अभी इसी वक्त इस एप्लिकेशन को रिजेक्ट करने का आदेश दे रहा हूँ. आज ही आपको कम्युनिकेशन मिल जाएगा. और याद रखिए, एक बार रिजेक्ट हुआ तो अगली एप्लिकेशन के लिए पूरे एक साल का इंतजार करना होगा.
एक साल का करोड़ों का मुनाफा छोड़ने के लिए तैयार हैं?"
एमडी के माथे पर पसीना चमकने लगा. उसका सारा अहंकार भाप बनकर उड़ रहा था.




रामकृष्ण ठाकुर की महिमा 
फिर से वापस आए,
अमार सोनार बांग्ला फिर से 
बच्चा बच्चा गाए,
हर बेटी की करे सुरक्षा 
माँ काली विकराल.





अंततः
हर उम्मीद से परे जाकर
उसने खुद का हाथ पकड़ा
और
आहिस्ता-आहिस्ता
सशरीर खड़ा हो गया




राम !  आपका कल्याण हो, 
अतीव प्रसन्न हूँ मैं आप पर 
लक्ष्मण से भी संतुष्ट बहुत, 
मिलने आये मुझे यहाँ पर 

लंबा मार्ग तय करके आये, 
कष्ट और थकावट होगी 
दूर थकावट करने सीता, 
हृदय से उत्सुक जान पड़ती 

हैं अति ही सुकुमारी सीता, 
इससे पहले कष्ट न जाने 
पति प्रेम से प्रेरित होकर, 
वन प्रांतर में कई दुख झेले 




छः बजे के स्थान पर सुबह 5 बजे पाकिस्तान पर हमला कर दिया । क्योंकि उनकी नजर में यही सही समय था, छः बजे तो सूर्योदय हो जाएगा, लोग जाग जायेंगे। सुबह पांच बजे का समय एकदम उपयुक्त था - सब लोग सो रहे थे – वे लोग हक्के बक्के हो गए । और उसने जैसा कहा था, बैसा ही हुआ - उसने पूरे पाकिस्तान को थरथरा दिया । देखते ही देखते भारतीय सेनायें पाकिस्तान से सबसे बड़े शहर लाहौर से सिर्फ 15 मील दूर रह गईं |
तब तक राजनेता क्या कर रहे थे ? पूरी रात नेहरू और उनकी कैबिनेट विचार विमर्श में उलझी रही - ऐसा करने का क्या नतीजा होगा, बैसा करने से क्या होगा और सुबह 6 बजे तक भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए । तभी उन्होंने रेडियो पर सुना - 'जनरल चौधरी लाहौर में प्रवेश कर रहे हैं।'
यह स्थिति राजनेताओं के लिए असहनीय थी | 


सादर समर्पित
सादर वंदन
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