पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 18 सितंबर 2016

429.....किसी से न कहना

        सुप्रभात 
    सादर प्रणाम 
रविवारीय चर्चा मे 


पढ़ाई करवा म्हें जास्याँ 
ओ माँ पढ़ाई करवा म्हें जास्याँ

ओ म्हाने पढता ने किताब लादयो ऐ माँ
पढ़ाई करवा म्हें जास्याँ 
ओ माँ पढ़ाई करवा  म्हें जास्याँ

ओ म्हाने पढता ने  कागज कलम लादयो ऐ माँ 
पढा़ई करवा म्हें जास्याँ
ओ  माँ पढा़ई करवा म्हें जास्याँ


 चलते है 
आज की चुनिंदा
लिंको की ओर......


      
कहाँ गुज़ारा दिन कहाँ रात किसी से न कहना
यहाँ कोई राज़ की बात किसी से न कहना

बड़े तंगदिल हैं लोग इक पल में बदल जायेंगे
अपना मज़हब अपनी ज़ात किसी से न कहना

कौन है दोस्त कौन दुश्मन कहना मुश्किल है
खुलकर अपने ज़ज़्बात किसी से न कहना


निपट अकेलेपन का मिलजुल कर प्रतिकार करें

जितनी पाँखें फैलाता हूँ
अंदर कहीं सिमट जाता हूँ
मृग मरीचिका मन के अंदर
चलते-चलते थक जाता हूँ
कठिन मरूस्थल है पर, जीवन का त्यौहार करें


आजादी के बाद कांग्रेस नेताओं ने राजपूत जाति को शक्तिहीन करने के लिए सत्ता का प्रयोग करते हुए उनकी जागीरें समाप्त करने हेतु जागीरदारी उन्मूलन कानून बनाकर आर्थिक प्रहार किया, ताकि आर्थिक दृष्टि से भी शक्तिहीन हो जाये और राजपूत राजनैतिक तौर पर चुनौती ना दे सके। इस हेतु सन 1954 में जागीरदारी उन्मूलन कानून प्रारूप को तैयार करने के लिए राजस्थान क्षत्रिय महासभा व राजस्थान सरकार के बीच समझौता कराने हेतु गोविन्द बल्लभ पन्त को मध्यस्त बनाया गया। कोशिश करने पर भी इस समझौते में भूस्वामियों के प्रतिनिधियों को भाग नहीं लेने दिया गया।


इडली बनाने के लिए बाजार में रेडिमेड घोल मिलते है, लेकिन उनमें प्रिजरवेटिव होने से वे सेहत के लिए नुकसानदायक होते है। हम दालों को भिगोने और पिसने के झंजट के बिना भी सिर्फ रवे से तुरंत और स्वादिष्ट इडली बना सकते है। रवा इडली को ही हम थोड़ा सा बदल कर-कर तीन अलग-अलग अंदाज में परोस सकते है। तो आइए, जानते है रवा इडली के तीन अलग-अलग अंदाज के बारे में।


व्हिसल ब्लोअर ने व्हिसल बजायी
भक्तों की भीड़ आयी
की बड़ी नुक्ताचीनी 
व्हिसल छीनी
पलटाई
कट्टे की मानिन्द

••●●■■♤♤♡♡♡♡■■●●••
अब दिजिये 
आज्ञा 
सादर 

8 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस लिंक का पाठक भी जाग रहा है
    हाथ जोड़े माफी मांग रहा है !!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. मारवाड़ी में कविता पढकर मजा आ गया। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

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