पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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शनिवार, 17 सितंबर 2016

428.... अशेष शुभकामनायें





सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष



विश्वकर्मा जी का फोटो के लिए चित्र परिणाम



भारत संस्कृति प्रधान देश है. हमारी संस्कृति में हर उस चीज को पूजनीय बताया गया है जिसका प्रयोग हम दैनिक जीवन में करते हैं फिर चाहे वह जल हो या अग्नि. और आवश्यक वस्तुओं के बकायदा देव भी हैं जैसे पानी के लिए जल देव, अग्नि के अग्निदेव, वायु के लिए हम पवनदेव को पूजते हैं आदि. इसी तरह जीवन में यंत्रों का भी विशेष महत्व है. कलियुग का एक नाम कलयुग यानि कल का युग भी है. कल शब्द का एक मतलब यंत्र भी होता है यानि यंत्रों का युग. आप सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हजारों यंत्रों के सहारे ही तो चलते हैं. फोन, बिजली, पानी की टंकी जैसे ना जानें कितने यंत्र हम प्रतिदिन इस्तेमाल करते हैं. तो ऐसे में यंत्रों के देव को हम भूल कैसे सकते हैं.

भगवान विश्वकर्मा जी को धातुओं का रचयिता कहा जाता है और साथ ही प्राचीन काल में जितनी राजधानियां थीं, प्राय: सभी विश्वकर्मा की ही बनाई हुई थीं. यहां तक कि सतयुग का ‘स्वर्ग लोक’, त्रेता युग की ‘लंका’, द्वापर की ‘द्वारिका’ और कलयुग का ‘हस्तिनापुर’ आदि विश्वकर्मा द्वारा ही रचित हैं. स्वर्ग लोक से लेकर कलयुग तक भगवान विश्वकर्मा जी की रचना को देखा जा सकता है


क्या/कौन हैं जीवन और मौत?
दोनों हैं प्रेमी, रहते हैं सदियों तलक एक साथ,
तभी तो मनुष्य पैदा होते समय रोता हुआ आता है,
अपनी प्रेमिका 'मौत' से बिछुड़ने के दर्द के साथ




सर्व शिक्षा अभियान








अब कवि कहलाना बहुत सरल है, 
एक प्रकार से यह खेलों में नया खेल है। 
अगर कोई विषय नहीं सूझता तो ‘ढेला’ ही लिख दो 
और इसके बाद लिख दो वह ‘हँसता’ था।’














लेकिन इस शहर का आख़री पड़ाव नहीं हैं। 
यहाँ से आगे भी अनजान सड़के है, गुमनाम गलियाँ हैं। 
और न जाने मेरी ही जैसी कितनी ही अँधूरी प्रेम कहानियाँ हैं।
 लेकिन में वहाँ कभी नहीं जाता। 
तुमसे प्रेम करके में स्वार्थी भी हो गया हूँ। 
ईश्वर से जब भी माँगता हूँ, अपने लिए तुम्हें ही बस 
यहीं तक सीमित होकर रह गया हूँ। इस असीमित संसार में।







पड़ाव पर कविता के लिए चित्र परिणाम





सबसे अधिक क्रियाशील होते हैं बच्चे
पर कुछ काम जैसा काम हो ना
जिसमें कुछ जोड़ने को हो कुछ तोड़ने को
कुछ नया करने को हो




फिर मिलेंगे .... तब तक के लिए

आखरी सलाम


विभा  रानी  श्रीवास्तव












7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    सादर नमन
    पठनीय रचनाएँ
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया हलचल प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह! आँखों को मलमल मन को गुदगुदा गयी ये हलचल!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह! आँखों को मलमल मन को गुदगुदा गयी ये हलचल!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह! आँखों को मलमल मन को गुदगुदा गयी ये हलचल!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह! आँखों को मलमल मन को गुदगुदा गयी ये हलचल!!

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