पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शनिवार, 3 सितंबर 2016

414 ..... कविता



सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

भाव कविता की आत्मा है
शब्द शरीर
विधाएँ सौंदर्य प्रसाधन !
©किरण सिंह
♂♀
भाव और शब्द बिना तो कविता क्या अभिव्यक्ति ही नहीं हो सकती है



सीमाएं उसी राष्ट्र की विकसित और सुरक्षित रहेंगी
जो सदैव संघर्षरत रहेंगे l
जो लड़ना ही भूल जाएँ वो न स्वयं सुरक्षित रहेंगे
न ही अपने राष्ट्र को सुरक्षित बना पाएंगे




यह तमाम सहमतियों-असहमतियों से बुना
इसी धरती का मानवीय संबंध है। प्रेम में पुरुष के लिए स्त्री दर्पण की तरह है
जहाँ वह अपने को पाना चाहता है, उसे पाना चाहता है
जिसे उसने सदियों से वहाँ छोड़ रखा है। ।


कविता


सहज स्वभाविक जीवन को धकेल कर अपने पैर पसारता
आधुनिक जीवन कविता की चिंता का एक जरूरी विषय रहा है ।
सामाजिकता के ताने बाने को तार तार करती हुई जो नई समाज व्यवस्था बनी है
उसमें सहजता की जगह कृत्रिमता ने हड़प ली है ।



प्रकृति से सानिध्य


कभी कल कल करती सरिता,
या कभी गगन चुम्बी इमारतों से ये पेड़
कभी सीली ठंडी हवा
तो कभी हरियाली चरती हुई भेड।


कॉफी हाउस



ऐब ये है इन के हाथों में कुंद ज़बाँ की है तलवार
‘आली’ अफ़सर ‘इंशा’ बाबू ‘नासिर’ ‘मीर’ के बर-ख़ुरदार
‘फ़ैज़’ ने जो अब तक लिक्खा है क्या लिक्खा है सब बे-कार
उन को अदब की सेह्हत का ग़म मुझ को उन की सेह्हत का
ये बेचारे दुख के मारे जीने से हैं क्यूँ बे-ज़ार*



दीदार की हसरत



हसीन चेहरे को कहाँ सजने की फुरसत है
इस दिल को उन के दीदार की हसरत है
मासूम सी वो सादगी ही है उनकी पहचान
देखो बहारों मे छुपी वो सच मे कुदरत है


फिर मिलेंगे ...... तब तक के लिए


आखरी सलाम



विभा रानी श्रीवास्तव




4 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात
    अति सुन्दर प्रस्तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर शनिवारीय प्रस्तुति विभा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभप्रभात आंटी...
    सुंदर संकलन....
    आभार आप का....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...