आज जैसा कि शीर्षक दिया गया है कि आज की चर्चा गद्य विधा को समर्पित है ..... गद्य में भी अनेक विधाएँ होती हैं ......कहानी , लघु कथा , व्यंग्य , लेख ...संस्मरण .... ........ आज इन सबका कुछ मिला जुला रूप प्रस्तुत करने का प्रयास है ...... कुछ ले पाई हूँ .....कुछ फिर कभी ..... हमारे पुराने साथी अभी तक ब्लॉग को आबाद किये हुए हैं और एक से बढ़ कर एक पोस्ट लगाते हैं .... जानकारी युक्त होती हैं सभी पोस्ट .... और नए साथी ब्लॉगर भी ब्लॉग की दुनिया को चाक चौबंद किये हुए हैं ....
बहुत बार मैंने अपने पुराने साथियों को प्रत्यक्ष और कभी अप्रत्यक्ष रूप से सुझाव दिया कि पहले जैसी ब्लौगिंग नहीं होती तो कोई बात नहीं आप अपनी रचनाएँ तो ब्लॉग पर पोस्ट कर सकते हैं एक डायरी के रूप में ... लेकिन थोड़ी निराशा ही हाथ लगी ..... कहा तो कुछ नहीं लेकिन कुछ ऐसा प्रतीत हुआ कि बस यही कहने वाले कि पगला गयी हो क्या ?????????? आज कल कोई नहीं करता ब्लौगिंग . खैर अभी मनन चल ही रहा था कि ब्लॉग जगत के मार्गदर्शक की एक पोस्ट नज़र में आ गयी .....और सच्ची अब तो उसी पर अमल करने वाले हैं ...... कौन बेकार मुसीबत मोल ले ... समीर लाल जी सरल सी लगने वाली बातों से कहाँ तीर चला रहे हैं ये तो आप पढ़ कर ही जान पायेंगे ...
सुझाव देने का समय नहीं रहा अब
"एक सफलता ऐसी भी"
ये ठहराव जरूरी था- कोरोना काल पर चिंतन
कमला (भाग - 1)
कमला (भाग - 2)
जिन खोजा तीन पाइयां...
चाय बना लाती हूँ - कहती माला रसोई जाने केे लिए मुड़ी तो विद्या भी उसके साथ हो ली यह कहते हुए कि मैं भाभी की मदद करती हूँ.
आपके पापा के बारे में सुना था तबसे ही आपसे मिलने का मन हो रहा था. कैसे क्या हो गया था!चाय की पतीली गैस पर रखते माला भीगी पलकों से सब बताती रही.
बहुत बुरा हुआ लेकिन पीछे रह जाने वालों को हिम्मत रखनी पड़ती है. चाय विद्या ने ही कप में छानी. बिस्किट, नमकीन करीने से प्लेट में रखते हुए माला फिर से सुबक पड़ी.






























