आज रविवारीय अंक में
आप सभी को
सादर अभिवादन
....
तुमको मिल ही गया
कोई बेहतर
मुझसे !
मुझको भी मिल गया
कोई बेहतर
तुमसे !
पर कभी कभी दिल को यूँ भी लगता है …
हम जो इक दूसरे को मिल जाते
तो यक़ीनन वो होता बेहतर
सबसे !
.....
चलिए चलें आज की रचनाओं की ओर ...

फूल थे तुम, तो बड़े मुखर थे,
बंद थे, तो भी प्रखर थे,
विहँसते थे खिल कर, हवाओं में घुल कर,
बदल चुके हो, इतने तुम क्यूँ?
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया।

अरे, कोई समझाए
उस पगली को
जहां भय हो
वहां
न होता है धर्म
और न प्रेम।

चकवा चकवी मिलवा लागा
फूल कमल का खिलवा लागा
रस पीवा की वेराँ जावे
जागो म्हारा भमरा कलियाँ जगावे
कलियाँ की गलियाँ में सोई लिदा जी आखी रातलड़ी
ओ आखी रातलड़ी
जागो म्हारा हिवड़ा का हार जागी जाओ सा
चटक चाँदणी चितचोर चाली

वास्तव में हमें शरीर की नैसर्गिक क्रिया में रूकावट डालने वाली किसी भी चीज से बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार एकाध बार बहुत ही जरूरी वजह से गोली ली जा सकती है लेकिन किसी भी हालात में डॉक्टर की सलाह के बिना ये गोली नहीं लेनी चाहिए।

पहली सीढ़ी चढ़ी औ पहला पायदान लकड़ी का
जीवन की कड़ियों में जुड़ती हर एक एक कड़ी का
कर स्मरण सजाए मैंने अपने सपने
पृष्ठों के भी पृष्ठ कई देखे हैं मैंने
जीवन की कड़ियों में जुड़ती हर एक एक कड़ी का
कर स्मरण सजाए मैंने अपने सपने
पृष्ठों के भी पृष्ठ कई देखे हैं मैंने
....
आज बस
कल बड़ी दीदी आएगी
सादर
आज बस
कल बड़ी दीदी आएगी
सादर