शीर्षक पंक्ति: आदरणीय ओंकार जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
शनिवारीय अंक में प्रस्तुत हैं पाँच रचनाओं के चुनिंदा
लिंक-
राष्ट्रप्रेम की उत्कट इच्छा,
अग्नि पथ पर प्रबल परीक्षा।
कोई विपदा आ जाये तो
रण नाद का वारिद स्वर दे।
माता हमको वर दे।
मुझे नहीं दिखती किसी की भूख बेरोजगारी या शापित जीवन नहीं दिखता किसी स्त्री पर अत्याचार बलात्कार नहीं दिखता बाल शोषण नहीं दिखता गरीबी एक अभिशाप का बोल्ड अक्षरों में लिखा अदृश्य बोर्ड नहीं होते व्यथित अब प्रियतम मेरे
प्रियतम मेरे
प्रियतम मेरे
दर्देदिल ने कुछ
ऐसा किया
हो गया मै
तुम्हारा उम्र भर के लिए