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रविवार, 23 जनवरी 2022

3282..."स्वतंत्र होकर जीने का अर्थ सिखा गए सुभाष...

सादर अभिवादन।

रविवारीय अंक में पाँच रचनाएँ लेकर हाज़िर हूँ।

कल रात्रि आठ बजे तक करोना से पीड़ित भारतरत्न भारत-कोकिला लता दीदी के स्वास्थ्य को लेकर देशभर में चिंताओं और अफ़वाहों का दौर जारी था। ईश्वर से कामना है कि वे चिरायु हों।

चित्र साभार गूगल 


आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती है। 

कृतज्ञ राष्ट्र अपने लाड़ले सपूत को अगाध श्रद्धा और विश्वास के साथ याद कर रहा है। 

नेताजी को समर्पित मेरा काव्यांश-

"स्वतंत्र होकर जीने का अर्थ,

सिखा गए सुभाष,

आज़ादी को कलेजे से लगाना,

 सिखा गए सुभाष।

 स्वतंत्रता का मर्म वह क्या जाने,

 जो स्वतंत्र वातावरण में खेला है,

 उस पीढ़ी से कभी पूछो!

 जिसने पराधीनता का असहय दर्द झेला है...!"

 -रवीन्द्र सिंह यादव

आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-

ठंडी के मौसम पर कविता

मख़मली हवा भी नहीं  सुहाती चुभती तीरों जैसी

किट-किट बजते दाँत काम करे न मफ़लर,जर्सी ,

धार कुहरे का अंगरखा फ़िज़ा ठंड से है अनबूझ

शीत लहर का भी प्रकोप उसपर बारिश की बूँद

उनकी बातें


संदली, वही, खुश्बू ले आईं हवाएँ,

छू कर, बह चली, इक पवन,

अजीब सी, चुभन,

बहके से क्षण की, बहकी सौगातें,

कह गईं, उनकी ही बातें!

फिर, सुबह ले आई, उसी की भीनी यादें...

पथ के अनुगामी

चहुँ ओर तिमिर घनघोर घना

है दूर मयूख कहीं नभ में

उस नवल किरन की छाँव तले

तुम बढ़ती जाना आज प्रिये ।।

आंकड़े कागजों पर

गमछे में धूल बाँध

रंग भरे पन्ने

खेतों की मेड़ों पर

लगते हैं गन्ने

झुनझुना है दान का

नाच उठे लूले।।

पुरुषों के लिए भी कानून बनाने का समय

इसकी नज़ीर के तौर पर गुरुग्राम का आयुषी भाटिया केस हो या मद्रास हाईकोर्ट और पुणे की सेशन कोर्ट के ‘दो फैसले’ जो हमें अपनी सामाजिक व्‍यवस्‍थाओं और घरों में दिए जाने वाले संस्कारों को फिर से खंगालने को बाध्‍य कर रहे हैं कि आखिर सभ्‍यता के ये कौन से मानदंड हैं जिन्‍हें हम सशक्‍तीकरण और स्‍वतंत्रता के खांचों में फिट करके स्‍वयं को आधुनिक साबित करने में जुटे हुए हैं।

छोरो शेखावाटी रो

मातृ भूमि रो मान बढ़ाऊँ

जग माह ऊंचो नाम करुँ।

रीढ़ बणु मैं अपणे देश री

इह जन्म एसो काम करुँ।

गळियाँ गूंजे मेर नाम री

आँखड़ल्यां रो है सुपणों।।

*****

आज बस यहीं तक

फिर मिलेंगे आगामी गुरुवार।

रवीन्द्र सिंह यादव


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