सादर अभिवादन।
"पाँच लिंकों का आनन्द" परिवार की ओर से
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

चित्र साभार: गूगल
चुनावी मौसम की एक और होली गुज़र रही है।
रंगों का उमंगोंभरा त्योहार हमारे जीवन में उत्साह भर देता है।
सद्भावना ,सामाजिक एकता और प्रेम का पर्व एक लोकप्रिय जुमले "बुरा न मानो होली है"
के साथ बड़ा दिल दिखाने को कहता है।
आदर्श रूप में होली का पर्व हमारे जीवन में पवित्र विचारों का झौंका लाता है
वहीँ व्यावहारिकता में हमारा समाज नफ़रत की बद-मिजाज़ फ़ज़ा से घिरा हुआ है।
आइये माहौल को ख़ुशनुमा बनाने में अपना-अपना योगदान दें।
अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलते हैं-

बैरन सखियन, फगुआ गाये
बिरहन मन झुलसायो.
धधक धधक, जर जियरा धनके
अंग रंग सनकायो.
जुलमी फागुन! पिया न आयो!
पूरब दिशा से आयो फकीरो/ लाया तुमड़ि को बीज, तुम भी राग मनाओ
अब लागे तुमड़ी बोयण लागे/ बोये सकल खेत, तुम भी राग मनाओ
अब लागे तुमड़ी जामण लागे/जागे सकल खेत तुम फाग मनाओ
अब लागे तुमड़ी गोडण लागे/गोड़े सकल खेत तुम भी फाग मनाओ
अब लागे तुमड़ी फूलण लागे/फूल सकल खेत तुम भी फाग मनाओ
अब लागे तुमणी काटण लागे/काटे सकल खेत तुम भी

जली होलिका जैसे उस दिन
जलें सभी संशय हर उर के,
शेष रहे प्रहलाद खुशी का
मिलन घटे उससे जी भर के !
होली.......श्वेता सिन्हा

अमिया बौर की गंध मतायी
बड़ी नशीली भोर रे
कूहू विरह की पाती लिखे
छलकी अँखियाँ कोर रे
तन पिंजरा आकुल डोले
नाम जपे मन कीर-सा
होली.......श्वेता सिन्हा

अमिया बौर की गंध मतायी
बड़ी नशीली भोर रे
कूहू विरह की पाती लिखे
छलकी अँखियाँ कोर रे
तन पिंजरा आकुल डोले
नाम जपे मन कीर-सा

गोकुल की गलियों में मची है धूम,
आसमां भी धरती को रहा है चूम।
भीनी-भीनी बहे फागुनी बयार,
मस्त-मस्त मौसम मन रहा है झूम।

अबीर-गुलाल है उड़ता
गोरी के गालों को रंगता
मारे भर-भर पिचकारी
भींगे चुनरिया सारी
रंगों में होकर सराबोर सब
नाचें मिलजुलकर सारे
खुशियों की धूम मची है
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
अख़बार में होली की ख़बरें ध्यान से पढ़ियेगा।
होली !!!!!!!!!है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
रवीन्द्र सिंह यादव




