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गुरुवार, 21 मार्च 2019

1343....चुनावी मौसम की एक और होली गुज़र रही है....

सादर अभिवादन। 
"पाँच लिंकों का आनन्द" परिवार की ओर से 
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। 

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चित्र साभार: गूगल 

चुनावी मौसम की एक और होली गुज़र रही है। 
रंगों का उमंगोंभरा त्योहार हमारे जीवन में उत्साह भर देता है। 
सद्भावना ,सामाजिक एकता और प्रेम का पर्व एक लोकप्रिय जुमले "बुरा न मानो होली है" 
के साथ बड़ा दिल दिखाने को कहता है। 
आदर्श रूप में होली का पर्व हमारे जीवन में पवित्र विचारों का झौंका लाता है 
वहीँ व्यावहारिकता में हमारा समाज नफ़रत की बद-मिजाज़ फ़ज़ा से घिरा हुआ है। 
आइये माहौल को ख़ुशनुमा बनाने में अपना-अपना योगदान दें। 


अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलते हैं-     


बैरन सखियन, फगुआ गाये
बिरहन  मन झुलसायो.
धधक धधक, जर जियरा धनके
अंग रंग सनकायो.
जुलमी फागुन! पिया न आयो!




 पूरब दिशा से आयो फकीरो/ लाया तुमड़ि को बीज, तुम भी राग मनाओ
अब लागे तुमड़ी बोयण लागे/ बोये सकल खेत, तुम भी राग मनाओ
अब लागे तुमड़ी जामण लागे/जागे सकल खेत तुम फाग मनाओ
अब लागे तुमड़ी गोडण लागे/गोड़े सकल खेत तुम भी फाग मनाओ
अब लागे तुमड़ी फूलण लागे/फूल सकल खेत तुम भी फाग मनाओ 
अब लागे तुमणी काटण लागे/काटे सकल खेत तुम भी




जली होलिका जैसे उस दिन
जलें सभी संशय हर उर के,
शेष रहे प्रहलाद खुशी का
मिलन घटे उससे जी भर के !

होली.......श्वेता सिन्हा 



अमिया बौर की गंध मतायी
बड़ी नशीली भोर रे
कूहू विरह की पाती लिखे
छलकी अँखियाँ कोर रे
तन पिंजरा आकुल डोले
नाम जपे मन कीर-सा



गोकुल की गलियों में मची है धूम,
आसमां भी धरती को रहा है चूम।
भीनी-भीनी बहे फागुनी बयार,
मस्त-मस्त मौसम मन रहा है झूम।




अबीर-गुलाल है उड़ता
गोरी के गालों को रंगता
मारे भर-भर पिचकारी
भींगे चुनरिया सारी
रंगों में होकर सराबोर सब
नाचें मिलजुलकर सारे
खुशियों की धूम मची है
आई रे होली आई,आई रे होली
....
हम-क़दम का नया विषय

यहाँ देखिए

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार। 

अख़बार में होली की ख़बरें ध्यान से पढ़ियेगा। 
होली !!!!!!!!!है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

रवीन्द्र सिंह यादव 

बुधवार, 20 मार्च 2019

1342..फागुन में बौराने का भी अलग आनंद है..



।।रंग संग वंदन।।



तन्द्रातिमिर वसन, माटी तन,

क्षण भर का उल्लास!

फिर भी धरती के जीवन में

आता है मधुमास!
किलक रही कलिका बन धरती,
सूरज मधुकर वीर!
खेल रहा होली, शर भर-भर
तेजस का तूणीर!
पंडित नरेन्द्र शर्मा 
🌺🔅🌺
फगुनाहट की आहट है..जादा समय न लेते हुए नज़र डालते हैं निम्न लिंकों पर..✍


आदरणीय दिगंबर नासवा जी की..



तेरी हर शै मुझे भाए, तो क्या वो इश्क़ होगा 

मुझे तू देख शरमाए, तो क्या वो इश्क़ होगा  



हवा में गूंजती है जो हमेशा इश्क़ बन कर  

वो सरगम सुन नहीं पाए तो क्या वो इश्क़ होगा 


🌺🔅🌺

ब्लॉग जज़्बात से..


खुद को तलाशने की कोशिश में

स्वयं के एहसासों के अवशेषों से
कई बार टकराया
निःशब्द स्व-श्वासों की आहट से
कई बार चकराया..

🌺🔅🌺

फागुन में बौराने या फगियाने का भी अपना एक अलग ही आनंद है! फागुन यानी वसंत ऋतु का महीना।    फागुन में इंसान बिना विटामिन की गोली निगले भी युवा और तरोताज़ा महसूस करने लगते हैं। नित्य शाम-सवेरे शक्तिवर्द्धक चूर्ण का सेवन किए बिना ही घोड़े जैसी फुर्ती से दौड़ने लगते हैं,

🌺🔅🌺



सही में यार !

बहुत मुश्किल है !

सही क्या ?
ग़लत क्या ?
इस सब की विवेचना ।
कोई कितना करे ?..

🌺🔅🌺





अगन होलिका की है 

बासंती मौसम बौराया

मन मदमस्त हुआ मुस्काया,
फागुन पवन बही है जबसे
अंतर में उल्लास समाया !
रंगों ने फिर दिया निमंत्रण
मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन,
🌺🔅🌺

चलते चलते फगुनिया राग के साथ ..आप सभी को 

होली की सभी रंग मुबारक।




हम-क़दम का नया विषय

।।इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह 'तृप्ति'...✍
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