आप सभी को
यथायोग्य प्रणामाशीष
मुझे बैंगलोर में रहना है... परिवार वालों की इच्छा है
रहना पसंद नहीं आ रहा ... कारण क्या हो सकता है...
हिन्दुस्तान में हिन्दी के लिए गुहार
जन्मदिन कल है हिन्दी के जनक
मुझे बैंगलोर में रहना है... परिवार वालों की इच्छा है
रहना पसंद नहीं आ रहा ... कारण क्या हो सकता है...
हिन्दुस्तान में हिन्दी के लिए गुहार
जन्मदिन कल है हिन्दी के जनक
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
फिर मिलेंगे...
हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का पैंतीसवाँ क़दम
इस सप्ताह का विषय है
'मितवा'
...उदाहरण...
कल से क्या
आज से गवाही ले मितवा
आंखों में झीलें हैं
झीलों में रंग
रंगवती हलचल की
-हरीश भादानी
उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है
एक खास बात और आप इस शब्द पर फिल्मी गीत भी दे सकते हैं
चाहूँगा मैं तुझे....
दर्द भी तू चैन भी तू
दरस भी तू नैन भी तू
मितवा ...
मेरे यार तुझको बार बार
आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा
अंतिम तिथि :: आजशनिवार 08 सितम्बर 2018
प्रकाशन तिथि :: 10 सितम्बर 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
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