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सोमवार, 30 मार्च 2020

1717....हम-क़दम का एक सौ तेरहवाँ अंक.. काजल

सोमवारीय विशेषांक 
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वैश्विक महामारी,मानो जीवन-मृत्यु के मध्य की
काली लकीर मिटाने, जिद पर उतर आयी है।
देख रहे हो न मानुष प्रकृति मरम्मती के लिए
काल पर सवार हो यम के रुप में घर आयी है,
माँ धरणी के कोख के मृत बीजों के शाप से
सृष्टि सामूहिक संहार का ये कैसा वर लायी है?

★
काजल पर आज की पंक्तियाँ
प्रिय कामिनी जी की रचना से 
उद्धत है-

काजल " गोरी के आँखों को सजाये  तो उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देता हैं.... नन्हे शिशु के नैनो में  जब माँ काजल भर के उसकी बलाएँ लेती हैं तो ....वही काजल उस शिशु के लिए नजरबटु बन शिशु की हर बुरी नजरों से रक्षा करता हैं लेकिन ......वही काजल जब दामन पर लग जाएँ तो दाग बन जाता हैं।
   हमारे भारतीय संस्कृति के  श्रृंगार में काजल का एक खास स्थान हैं। यदि आँखें काजल बिना सुनी हो तो श्रृंगार अधूरा ही रहता हैं। काजल ने  गोरी के आँखों में ही अपनी  खास जगह नहीं बनाई बल्कि कवियों की कविताएं हो या गीतकारों के गीत या शायरों की शायरी काजल ने सबके दिलों और कलम पर भी अपना हक जमा रखा हैं


★★★

कालजयी रचनाएँ इस बार हम हमारे प्रिय ब्लॉगर 
रचनाकारों के ब्लॉग से लेकर आये है।
आखिर इनकी रचनाएँ भी तो अनमोल
साहित्यिक धरोहर है।

★

आदरणीया प्रीति अज्ञात जी
इन दिनों

जो सुबह के रेशमी तकिये पर 
रोशनी का स्नेहिल स्पर्श पाकर 
ढुलक जाती है अनायास
स्वप्न..है दमित इच्छाओं की आतिशबाज़ी
उम्मीद...अलादीन का खोया चिराग़

★

आदरणीय दिगंबर नासवा जी
सफ़र जो आसान नहीं

चुभने के कितने समय बाद तक
वक़्त का महीन तिनका 
घूमता रहता है दर्द का तूफानी दरिया बन कर
पाँव में चुभा छोटा सा लम्हा
शरीर छलनी होने पे ही निकल पाता है।

★

आदरणीय ज्योति खरे सर
वक्ष में फोड़ा हुआ है

जानते हैं इस बात को
वक्ष में फोड़ा हुआ
तरस इनकी देखिये
वह अंग छोड़ा हुआ


रोटी नुमा चाँद भी
अब दे रहा है गाली--

★★★★★

नियमित रचनाएँ
आदरणीय साधना वैद जी
काजल की कोठरी

भ्रष्टाचार का क्षेत्र और विस्तार इतना व्यापक और संक्रामक है कि कोई आश्चर्य नहीं होगा यदि ऐसे तथ्य सामने आयें कि भारत की आबादी का एक बहुत बड़ा प्रतिशत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त है ! भारत के संविधान के अनुसार रिश्वत लेना और देना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं ! इस तरह रिश्वत माँगने वाला भी अपराधी है और रिश्वत देने वाला भी अपराधी है !



आदरणीय आशा सक्सेना जी
कोठरी काजल की

दूरदर्शन पर भी बहस ऐसे दीखती है
मानो शेर अभी  झपटेगा  शिकार पर
दूसरा मैमने सा गिडगिडा रहा हो
बच्चे तक कहने लगते हैं
क्या इन में तमीज नहीं
इनकी मम्मीं ने क्या
कुछ नहीं सिखाया इनको
सियासत का गलियारा
काई से भरा हुआ है
जितना भी सम्हल कर चलो
पैर फिसल ही जाते हैं
गिरने पर सहारा दे कर
उठाने वाला कोई नहीं होता
सियासत है कोठारी काजल की
कोई न बचा इससे
जो भी भीतर  गया
बच  न पाया  कालिख  से




★★★★★★

आदरणीय आशा सक्सेना
जब भी कोरा कागज़ देखा ...

जब भी कोरा कागज़ देखा
पत्र तुम्हें लिखना चाहा
लिखने के लिए स्याही न चुनी
आँसुओं में घुले काजल को चुना
जब वे भी जान न डाल पाये
मुझे पसंद नहीं आये
अजीब सा जुनून चढ़ा
अपने खून से पत्र लिखा

★★★★★

आरणीय राधा तिवारी जी
कुण्डलिया " काजल " 
Image result for आँख का काजल फोटो
काजल आँखों पर लगा, नैन रही मटकाय।
देख सजन को सामने, गोरी भी इठलाय।।
गोरी भी इठलाय, झुका वो नैना बोले।
मुस्काती वो आय, सजन सम्मुख वो डोले।
कह राधे गोपाल, सजन को देखे हरपल।
नैन रही मटकाय, लगाकर वो तो काजल।।

★★★★★

आदरणीय कामिनी सिन्हा जी
काजल से अथाह प्रेम

" काजल " 
गोरी के आँखों को सजाये  तो 
उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देता हैं.... 
नन्हे शिशु के नैनो में  
जब माँ काजल भर के 
उसकी बलाएँ लेती हैं तो ....
वही काजल उस शिशु के लिए 
नजरबटु बन शिशु की 
हर बुरी नजरों से रक्षा करता हैं 
लेकिन ......
वही काजल जब दामन पर लग जाएँ 
तो दाग बन जाता हैं।




★★★★★

आदरणीय शुभा मेहता
काजल
सखी री.....
मेरा काजल बह-बह जाए 
कब से बैठी आस लगाए 
बैरी पिया ना आए ....
सखी री ......
ना चिठिया ना कोई संदेसा 
इतना काहे... तरसाए ---

★★★★★★

आदरणीय पुरुषोत्तम कु. सिन्हा जी
नैन किनारे

बगैर आग, ये धुआँ कब उभरे!
चराग बिन, कब काजल ये सँवरे!
कोई आग, जली तो होगी!
हृदय ने ताप, सही तो होगी!
कारण है, कोई ना कोई!
क्यूँ बहते हैं जल-धार, नैन किनारे!

★★★★★★

आदरणीय अमित  श्रीवास्तव जी
लॉक डाऊन
लॉक डाउन होंठों पे क्यों,
लबों पे हँसी आने दो,
लफ़्ज़ों को आपस मे,
 घुल जाने दो।

लॉक डाउन निगाहों में क्यों,
नज़रों में शोखी आने दो,
नज़र से नज़र मिलाने दो,
काजल को बादल में घुल जाने दो।

★★★★★

आदरणीय उर्मिला सिंह
हम होंगे कामयाब एक दिन

देश गुलजार होगा, 
हंसेगा नयन काजल, 
बजेगी पांव की पायल..... 
'माता की स्नेह वर्षा,
तन मन आल्हादित कर जाएगा ! 

हिम्मत  देंगी  हमें  "माँ दुर्गा" , 
आस्था विश्वास राहें दिखाएंगी... 
इस विषम घड़ी से भी हम , 
एक दिन निकल जाएंगे!! 

आदरणीय सुजाता प्रिय
काजल

अखियों में काजल भर,
मुझको जादू न कर ,बृजबाला !
तेरा काजल है मतवाला।

काले-मेघों से काजल चुराकर।
तूने अखियों में रख ली बसाकर।
अब मुझे न चुरा,
मुझको दिल में बसा,सुरबाला!
मै हूँ मोहन बाँसुरीवाला।





आज का अंक कैसा लगा
आप ही बताएँगे
कल का अंक आ रहा है
नया विषय लेकर
-श्वेता
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