सादर अभिवादन
लघु कथा का यह दूसरा पाक्षिक अंक
आपकी नज़र बताइएगा ये प्रयास कैसा लगा
कल स्वाधीनता दिवस धूम-धाम से मनाया गया
किसी भी किस्म की अवांछित गतिविधिया नजर नही आई
सुधी जन लिख नहीं रहे हैं , विभिन्न अखबारों व ब्लॉगों से एकत्रित कर
आपके सन्मुख परोसे हैं, अखबारों में प्रकाशित रचनाएं किसी
अन्य ब्लॉग में रख कर लाई गई है
देखें ये दूसरा प्रयास....
सलीका- ऋतु मिश्रा
एक वृद्ध महिला शेड के नीचे बारिश से बचने की कोशिश कर रही थी
और ठंड से कांप भी रही थी, चौकीदार उसे हटने को कह रहा था,
दिया अपना छाता और कॉफी का कप लेकर बाहर पहुंची
और मुस्कुराते हुए कहा अम्मा ये छाता रख लीजिये,
और थोड़ा
कॉफी पी लीजिए.
आज़ादी -अनीता निहलानी
आज रामू काम पर आया तो उसे अपने फटे-हाल वस्त्रों पर कोई शर्म नहीं आयी। कल उसे पहली पगार मिलने वाली थी, जिससे वह अपने लिए नये वस्त्र ख़रीद सकता था, और यही बात उसे भीतर ही भीतर प्रसन्न कर रही थी। तभी उसकी नज़र बाहर गई, उसका पिता मालिक से कुछ बात कर रहा था।किशोर रामू की समझ में आ गया, वह स्वतंत्र नहीं है, उसकी पगार पर उसका नहीं उसके पिता का अधिकार है, जो उसे पैसे कमाने का लोभ दिलाकर इस काम पर लगवा गया था। अगले दिन जब काम के बाद मालिक ने उसे बुलाया तो उसका मन आशंकित था। वह चुपचाप खड़ा था, मालिक ने पाँच सौ का नोट उसे पकड़ाया और प्रश्न भरी निगाह से उसे देखा। रामू चुप खड़ा रहा। पाँच हज़ार की जगह मात्र पाँच सौ रुपये पाकर भी उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया। मालिक ने अपने आप ही कहा, शेष रुपये तुम्हारे नाम से जमा करवा दिये हैं। तुम्हारे पिता ने कहा है, एक वर्ष बाद तुम फिर से स्कूल जा सकोगे, तब काम आयेंगे। रामू की आँखें स्वतंत्रता की चमक से भर उठीं।
स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएं
धर्म व अर्थ, काम और मोक्ष
भारत विकसित देश बनेगा
चारों का पुरुषार्थ कर रहा,
हर कार्य उस हितार्थ कर रहा !
गौरवशाली परंपरा को
विश्व-मित्र बन गया है भारत !
जारी रखता आया भारत,
योग-ध्यान सबको सिखा कर
-अनीता निहलानी
(उपरोक्त दोनों रचना किसी ब्लॉग में नही है)
एक व्यापारी को नींद न आने की बीमारी थी।
उसका नौकर मालिक की बीमारी से दुखी रहता था।
एक दिन व्यापारी अपने नौकर को सारी संपत्ति देकर चल बसा।
भाभी घर छोड़कर जा रही थी
उसने अलमारी में अपनी जगह खाली की चाबियां मेज पर रक्खी, मां के लिए दवा रखी,
दरवाजे के पास के बिखरे जूते करीने से रखे और जाते-जाते गंदे बर्तन भी धो दिए
दरवाजे खड़े भैया ने पूछा इतनी नाराजगी के बाद ये सब?
उच्च शिक्षा के लिए मां अपनी बेटी को दूसरे शहर भेज रही थी।दोनों ट्रेन की प्रतीक्षा कर रही थी
प्रज्ञा ने मां का हाथ थाम कर धीरे से पूछा मां अगर मैं सफल होकर नहीं लौटी तो
?
मां मुस्कुराई और बोली मंजिल मिले ना मिले बस
अपने सपनों का साथ मत छोड़ना, मुझे तेरी सफलता से अधिक
तेरे साहस पर भरोसा है ...
घाटी के एक सुरम्य पर्यटन स्थल में सघन सर्च ऑपरेशन चल रहा था ! कुछ विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली थी कि दिन में किसी भी समय सैलानियों पर आतंकी हमला हो सकता है !
तभी गुलमोहर के एक पेड़ के पीछे लेफ्टीनेंट असलम को कुछ हलचल का आभास हुआ !
असलम ने अपनी कमीज़ के नीचे बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी ! वह तेज़ी से पेड़ की तरफ
दौड़ा और उसने भागने की तैयारी में जुटे आतंकवादी के चहरे से नकाब खींच ली ! यह अशरफ था
उसके बचपन का दोस्त और पड़ोसी ! असलम को देखते ही कुछ पल को आतंकी ठिठका फिर ज़ोर से उसे गले लगा कर बोला, “अरे वाह असलम तुम तो अपने ही यार निकले,
तुमने तो जान ही निकाल दी थी मेरी ! चलो मेरे साथ अपने आका से मिलवाता हूँ
तुम्हें ! वारे न्यारे हो जाएंगे तुम्हारे भी !” आतंकी ने असलम की बाँह थामी !
तभी असलम ने अशरफ के दोनों बाजुओं को पीठ के पीछे कस कर पकड़ उसे अपने
काबू में ले लिया और उसकी कनपटी पर रिवॉल्वर लगा कड़कती हुई आवाज़ में गरजा !
“कौन यार ! किसका यार ? यहाँ तुम सिर्फ एक आतंकी हो, देश और कौम के गुनहगार और
मैं हूँ एक फ़ौजी ! भारत माँ का लाल !
सादर समर्पित
वंदन
सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदन
शुभ प्रभात
जवाब देंहटाएंअगला अंकः 30 अगस्त को
प्रेषण तिथिः 28 अगस्त
विषयः रतजगा, जगराता
कृपया नोट करें
वंदन