बृहस्पति को देवताओ के गुरु माना जाता है,
अत: इस दिन को गुरुवार भी कहा जाता है।
रचनाएं
उपासना सियाग एक ख्यातिप्रात रचनाकार
ने लिखना कम कर दिया है
कुछ जूनी रचनाएं उनकी इस अंक में है
उनको कृपया लिखने पर मजबूर करें
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दादा - दादी टीवी के आगे बैठे हैं ।
दादी - " चीवी चांऊ (टीवी चलाऊं) ?"
दादा जी - " हाँ...
" दादी - " मिक्की माउछ चांऊ !
दादा जी -" नहीं ऐलीफैत चाओ !"
दादा - दादी का सम्मिलित ठहाका गूंजा , लेकिन आंखों में नमी थी
कोरे काग़ज़ पर
सिर्फ़ एक प्रश्नचिह्न।
जवाब के बिना
हर सवाल है अधूरा ।
सवाल पर औंधा लटका
कोई कैसे जिए ?
दिल को दिल से राह !
अरे सब झूठी बातें हैं ।
चिन्तन में केवल छल बल
और मन में घातें हैं ।
नेह वचन विश्वास कि जैसे
माट-मटूने री ।
ईशान कोण के
उस पार है कहीं
तुम्हारा
ठिकाना । अभी बहुत दूर है मुहाने का प्रकाश स्तंभ,
पहाड़, तलहटी, ग्राम
शहर, पुरातन
मंदिर,
उदास से खड़े हैं दोनों पार असंख्य आशातीत
सोचती हूँ कभी- कभी
इंतज़ार वाली तकदीर लिए
रखती होगी
ये छब्बीस- सताईस पौरवे वाली
उंगलियाँ।
कॉमरेड कुलकर्णी ने प्रिया की ओर देखा. "प्रिया, तुमने जो रैंडम सर्वे किया था, उसके आधार पर और तकनीक के क्षेत्र में परिवर्तनों के आधार पर तुम्हारी राय क्या है?"
प्रिया ने अपना टैबलेट खोला और डेटा दिखाते हुए कहा, "सर, आज स्थिति यह है कि इंटीग्रेटेड सर्किट बनाने की तकनीक बहुत विकसित हो गयी है. इस फैक्ट्री ने पिछले चार-पाँच सालों से अपनी तकनीक में कोई विकास नहीं किया है. जिसके कारण इसका मुनाफा नई इकाइयों की अपेक्षा कम हुआ है. इसके ग्राहकों की संख्या कम हुई है, क्योंकि सब अपने उत्पादनों में एडवांस आई. सी. लगाना चाहते हैं. नयी इकाइयों के साथ बाजार में बने रहने के लिए इन्हें अपनी तकनीक का नवीनीकरण करना होगा, जिसमें इन्हें पूंजी लगाना होगा. संभवतः इसीलिए कंपनी इस इकाई को बंद करके इसकी जमीन को औद्योगिक आवासीय या व्यवसायिक में परिवर्तित करवाकर बिल्डरों की मदद से अच्छा मुनाफा काटना चाहती है. वह मामूली पूंजी लगाकर किसी नए औद्योगिक क्षेत्र में बैंकों से 70-80 प्रतिशत सस्ता ऋण लेकर नयी यूनिट लगाने की जुगत में है. वहाँ कंपनी को अच्छी सब्सिडी मिल जाएगी और अनेक प्रकार के टैक्सों से कम से कम पाँच साल के लिए छूट मिल जाएगी. कंपनी का यही प्लान है
युवक झल्लाकर बोला,
"जब आप ब्रह्मा जी के मंदिर में जाना हराम मानती हैं तो हम क्यों अजमेर शरीफ की
दरगाह पर जाकर अपना माथा फोड़ें।"
महिला युवक की माँ से शिकायती लहजे में बोली, "देखिये बहन जी। आपका लड़का तो बड़ा बदतमीज है।
ऐसी मजहबी कट्टरता की वजह से ही तो हमारी कौमी एकता में फूट पड़ती है।"
युवक की माँ मुस्कुराते हुए बोली,
खर्च कम किया जाए पर कैसे
पर बाजार तो बाजार है,
उसने हर पावन त्यौहार, समारोह, परंपरागत उत्सव सभी को
अपनी गिरफ्त में ले लिया है
और लेता जा रहा है.....
सादर समर्पित
सादर वंदन
वंदन
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