खुशहाली बताने वाला सॉफ्टवेयर
कहीं से भी आयात कर लो,
आँकड़ों की चमक में
सच्चाई का चेहरा
लहूलुहान ही सही।
हर खेल मे पहली चाल तेरी, फिर हारना तो तकदीर से है ।
तू मासूम भी, तू ही कातिल भी, हीरे सी तेरी तासीर तो है
मेरे आँसू समंदर नहीं, पर सबसे क़ीमती नीर तो है ।
फिर आँगन में उतरे,
और शाम ढलते-ढलते
मेरे माथे पर चाँदनी का टीका लगा दे।
ऐसी जगह... शायद कोई गाँव हो,
कोई पहाड़, कोई नदी का किनारा,
या शायद कोई ऐसा घर,
जहाँ मैं ख़ुद को थका हुआ ना पाऊँ।
नहीं आयुष!" शगुन ने दृढ़ता से कहा. "तूने दिवाली पर 'मुक्ति' को अपनी गोद में लिया था, याद है? तूने कहा था कि हम उसे लेबल्स से मुक्त रखेंगे. अगर तू खुद को 'एवरेज' के लेबल से मुक्त नहीं कर पाएगा, तो उसे क्या सिखाएगा? आठ अप्रैल एक युद्ध नहीं है, वह सिर्फ तेरे और उन सिद्धांतों के बीच की एक बातचीत है जिन्हें तूने पिछले छह महीनों में जिया है. तू बस उन सिद्धांतों को कागज़ पर उतार देना, परिणाम के बारे में सोचने पर समय खराब मत करना."
तुम जानते हो, समझ सकते हो! वह समय बतौर निजी लेने का नहीं था,” रीमा ने संयत स्वर में कहा।
“पर असर तो निजी तौर ही हुआ, न! जब तक जाँच पूरी हुई, मुझे ‘गुनहगार’ की तरह देखा गया। टीम की मीटिंग्स से बाहर रखा गया। किसी ने पूछा तक नहीं कि सच क्या है!”
रीमा की निगाहें झुक गईं। “जाँच में तुम निर्दोष पाए गए हो, क्लाइंट ने लिखित माफ़ी भेजी है।” उसने धीमी स्वर से कहा।
अमित हल्के से मुस्कुराया— “निर्दोष साबित होना और निर्दोष माना जाना—दो अलग बातें हैं, महोदया!” अमित की भौं टेढ़ी और नथुने फड़क रहे थे।





सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदन
शुभ प्रभात और शुभकामनाओं के संग आत्मीय आभार आपका
जवाब देंहटाएंउम्दा प्रस्तुतीकरण
शुभ प्रभात 🙏, आज के इस बेहतरीन अंक में मेरी रचना को शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार और धन्यवाद 🙏||
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर संकलन... हमारी रचना को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार और शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंमनुष्य का मनुष्य के साथ एड्जस्ट करना सीख लिया जाए तो और समस्या बचेगी ही क्या?
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर है यह संकलन