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रविवार, 8 दिसंबर 2019

1605....कहनी है इक बात हमें इस देश के पहरेदारों से


जय मां हाटेशवरी.....
एक के बाद एक रेप की घटना.....
कभी हैदराबाद में....कभी उनाव में.....
कभी तो  दोषी भाई ही......
कभी पिता भी हैवान निकलता है.....
जब घर में ही बेटी सुरक्षित न हो......
बेचारी को संरक्षण कहां मिलेगा......
हैदराबाद का ईनकौउंटर भी कहीं.....
बड़े लोगों को बचाने की साजिश तो नहीं.....
कहीं दोषी कोई और तो नहीं.....
जो बेखौफ घूम रहे हों.....
क्या ये वोही भारत है......
जहां ये कहा जाता था.....
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"-
..... जहाँ नारी की पूजा होती है,वहाँ देवताओं का निवास होता है।.....
जो पढ़ा....पेश है.....



हालात पर कुंडलियां
कैसा ये अधर्म हुआ,लगा बहुत आघात।
लगा बहुत आघात,समय कैसा है आया।
बना युवा उद्दंड,देख के मन घबराया।
नहीं रहा संस्कार,चढ़ा रहता है पारा।
बाल-वृद्ध लाचार,देखा खेल जो सारा।



गीतिका
बार बार होता बलात्कार जिम्मेदार कौन है
जिस्म का होता ब्यापार जिम्मेदार कौन है ?
आज जनता के साथ न्यायालय भी चुप है
कानून हुआ निस्सार जिम्मेदार कौन है ?
भारत में क्रिमिनल कानून, कमजोर लाचार क्यों है
स्वतंत्र भारत में अत्याचार, जिम्मेदार कौन है ?



हाइकु
मुदित मन
सजती मधुशाला
रीता है प्याला

साथ तुम्हारा
खिलाये इंद्रधनुष
इतराऊँ मैं
बात ही अलग है
चलने फिरने को रास्ते बहुत हैं
लेकिन पैसे देकर ट्रैडमिल पर चलने की बात ही अलग है
आईसक्रीम से फ़्रीज़ भरा पड़ा है
लेकिन फ़्री के स्कूप की बात ही अलग है
गाली गलोच -अपनी अपनी सोच
ये गाली देने की विधा भी निराली है
किसी को जानवर शेर कहो तो तारीफ़ ,
और गधा कहो तो गाली है
हमारी समझ में ये नहीं आता है
लक्ष्मीजी जिस पर सवारी करती है ,
किसी को उनका वाहन उल्लू बतलाना
गाली क्यों कहलाता है









कहनी है इक बात हमें इस देश के पहरेदारों से
यह फैलाया जाता रहा कि सिखों ने हिंदुओं की रक्षा की ! पर ज्ञातव्य है कि खालसा पंथ की स्थापना के समय ब्राह्मण, क्षत्रिय ही आगे आए थे। यह खुला सत्य है कि हर
परिवार ने अपना एक बेटा खालसा फौज के लिए दिया था। एक ओर जहां मराठे मुगलों से लड़ रहे थे वहीं राजपूतों और ब्राह्मणों ने भी मुग़ल साम्राज्य की नाक में दम कर
रखा था। जब पहली खालसा फौज बनी तो उसका नेतृत्व भाई प्राग दास जी, जो एक ब्राह्मण थे, उनके हाथों में था। उनके बाद उनके बेटे भाई मोहन दास जी ने कमान सम्हाली।
उनके अलावा सती दास जी, मति दास जी, दयाल दास जी जैसे ब्राह्मण वीरों ने गुरु जी की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे डाली। इतना ही नहीं गुरु जी को
शस्त्रों की शिक्षा देने वाले भी पंडित कृपा दत्त जी जैसा योद्धा पंजाब में दुसरा नहीं हुआ। एक बैरागी ब्राह्मण लक्ष्मण दास और उनके किशोर पुत्र अजय ने सरहिंद
में गुरु परिवार की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया और चप्पड़ चिड़ी की लड़ाई में विजय प्राप्त की। यही लक्ष्मण दास आगे चल कर बंदा बहादुर कहलाए।

कहने का तात्पर्य यही है कि भारत को खंड-खंड करने का स्वप्न देखने वालों से हमें होशियार रहने की जरुरत है। किसी के प्रलोभन, दरियादिली या झूठी सहानुभूति से
भ्रमित न होकर अपने देश और समाज के लिए ही अपने आप को सजग रखना है। फिर चाहे वह पाकिस्तान द्वारा किसी धर्मस्थली तक जाने की इजाजत दे बहलाने की मंशा हो या फिर
चीन द्वारा उसके यहां बेहतर व्यापार का प्रलोभन ! क्योंकि वे लोग भी जानते हैं कि धर्म के नाम पर हम कुछ जल्दी ही भावुक हो जाते हैं।

धन्यवाद।


8 टिप्‍पणियां:

  1. विविध विधाओं के साथ विविध विचारों पर बहुत उम्दा संकलन।
    सभी सामग्री पठनीय ।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर अंक, बेहतरीन प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. शानदार प्रस्तुतिकरण उम्दा लिंक संकलन।

    जवाब देंहटाएं

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