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मंगलवार, 23 जुलाई 2019

1467....एक ही ब्लॉग से..बंजारा बस्ती के वाशिन्दे

सादर अभिवादन
मुखरित मौन के चक्कर में भूल गए
सारी ताजी रचनाएँ वहाँ लगा आए
यहाँ भी आना है...
ये वक्त पर याद आया...
चलिए चलें आज की रचनाएँ देखें...
एक अनोखा अँक....
एक ही ब्लॉग से..बंजारा बस्ती के वाशिन्दे
ब्लॉगर- सुबोध सिन्हा
..........

सुबोध जी का सवाल ...
आदमी जन्म लेने से पहले ही 
जाति-धर्म के बंधन से बंध जाता है, 
तो क्या मरने के बाद वह 
ना श्मशान और ना ही क़ब्रिस्तान जा कर .... 
वह अपना देहदान कर इस 
अनुबंधन से मुक्त हो सकता है !?
..........

कोमल भावनाओं और
रूमानी अहसासों की
आड़ी-तिरछी कमाचियों से
बुना सूप तुम्हारे मन का

तुम साँकल बन
दरवाज़े पर
स्पंदनहीन
लटकती रहना

मैं बन झोंका
पुरवाईया का
स्पंदित करने
आऊँगा...

अपने कंधों पर लिए
अपने पूर्वजों के डी. एन. ए. का
अनमना-सा अनचाहा बोझ
ठीक उस मज़बूर मसीहे की तरह
जो  था मज़बूर अंतिम क्षणों में
स्वयं के कंधे पर ढोने को वो सलीब
जिस सलीब पर था टांका जाना उसे
अन्ततः समक्ष जन सैलाब के ...

'नर्सरी' की नौबत ही ना आई
बिस्तर के पास तुम्हारे छुटपन में
जो तीन बड़े-बड़े वर्णमाला, गिनती
और 'अल्फाबेट्स' के 'कैलेंडर' था लटकाया
बेटा ! प्यार कर ही पाया कहाँ
मैं तुम्हारा एक पापा जो ठहरा...

साहिब !
ये तो इन्सानी फ़ितरत है
कि जब उसकी जरूरत है
तो होठों से लगाता है
नहीं तो ... ठोकरों में सजाता है
ये देखिए ना हथेलियों के दायरे में मेरे
बोतल बदरंग-सा
ये रहता है जब-जब भरा-भरा
रंगीन मिठास भरा शीतल पेय से
........
आज अब बस...
अब विषय देखिए ये भी 
कुछ अनोखा सा ही है
इक्यासिवां विषय
धूम्रपान निषेध
सिगरेट
इनको देखो ज़रा - 
ये दिवाली पर अस्थमा की मरीज़ बन जाती है 
और सुट्टे लगाते वक्त तंदरुस्ती की चमकार। 
इसकी अम्मा इससे भी दस कदम आगे बढ़ गई है, 
वो सिगार फूंक रही है जमाई के साथ। 
ये हैं हिंदुस्तानी महिलाओं की रोल मॉडल। 
क्या बात! क्या बात! क्या बात! 
इन माँ-बेटी के मुंह पर एक ज़ोरदार झन्नाटेदार लात। 
भक्क! साली मक्कार, झूठी, पाखंडी औरत।
...........
उपराक्त चित्र फेसबुक वाल से
सौजन्यः तुषार राज रस्तोगी

प्रेषण तिथि- 27 जुलाई 2019 तीन बजे तक
प्रकाशन तिथि- 29 जुलाई 2019
प्रस्तुतियाँ ब्लॉग सम्पर्क प्रारुप पर ही मान्य
आज्ञा दें
यशोदा

28 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात...
    ये तो इन्सानी फ़ितरत है
    कि जब उसकी जरूरत है
    तो होठों से लगाता है
    नहीं तो ... ठोकरों में सजाता है
    बढ़िया और बहुत बढ़िया..
    शुभकामनाएँ सुबोध जी को..
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति। शुभकामनाएं सुबोध जी के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाहः
    बहुत सुंदर संकलन
    साधुवाद छोटी बहना
    हार्दिक बधाई श्री सुबोध कुमार सिन्हा(पटना) जी

    जवाब देंहटाएं
  4. सबसे पहले मन से शुक्रिया ( शायद ये शब्द छोटा पड़ जाए अभिव्यक्ति के लिए ) कहूँगा श्वेता सिन्हा जी का जिन्होंने मुझे ब्लॉग के "ककहरा" से परिचित करवाया। वर्ना मैं एक आम इंसान अब तक (उम्र के 53वें पड़ाव तक) इन सब से अनभिज्ञ, अछूता था।
    फिर मन से धन्यवाद देना चाहूँगा यशोदा जी का जिन्होंने मेरी मामूली अनगढ़े ईंट-पत्थरर जैसे रचनाओं को अपने "पांच लिंकों का आनंद" के 1867 वें अंक के रेशमी चादर में टाँक कर उन पत्थरों का मान बढ़ा दिया।
    "पांच लिंकों का आनंद" के समस्त समूह को हार्दिक नमन ....
    अंत में एक बात और ... लेख्य-मंजूषा का भी धन्यवाद , जिस संस्था से श्वेता सिन्हा जैसी शख़्सियत मुझ अदना इंसान को मार्गदर्शिका के रूप में मिली हैं।
    (मन आह्लादित हो रहा है, हृदय-स्पन्दन की गति की तीव्रता बढ़ गई है....☺).....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी सुबोध सर..आपका बड़प्पन है आप इतना मान दे रहे हैं। एक सशक्त और विचारोत्तेजक लेखनी अपनी पहचान स्वयं बनाती है। साहित्यिक दुनिया में आपकी लेखनी को खूब यश.प्राप्त हो आप निरंतर उचित सराहना और सम्मान पाते रहे यही कामना है।
      मेरी भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ स्वीकार करें।

      हटाएं
  5. वाह !बहुत ही सुन्दर रचनाओं के लिंक
    हार्दिक बधाई आदरणीय सुबोध जी को,कमाल का लेखन है इन का
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह!!खूबसूरत संकलन । श्री सुबोध जी को हार्दिक बधाई ..बहुत ही उम्दा लेखनी ..बस उनकी कलम ऐसे ही चलती रहे यही शुभेच्छा ।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत शानदार अंक संयोजन ।आदरणीय सुबोध सिन्हा जी को उत्कृष्ट सृजन के लिए हार्दिक बधाई बहुत शानदार और आत्ममुग्ध करती उनकी लाजवाब रचनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मनमोहक सराहना के लिए मन से शुक्रिया !

      हटाएं
  8. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति । हार्दिक शुभ कामनाएँ सुबोध जी आपकी लेखन यात्रा के लिए । सभी रचनाएँ एक से बढ़ कर एक हैं और भावाभिव्यक्ति बेमिसाल ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. साधारण सी रचनाओं की सराहना के लिए हार्दिक शुक्रिया आपका मीना जी !

      हटाएं
  9. जी...दी आप.सदैव नवोदित ब्लॉगर्स का उत्साह वर्धन करती रहती है आपके कर्मठता को प्रणाम है।
    आज का यह अंक में सौकलित, विविधापूर्ण रंग बिखरेती अलग अलग भावों का खूबसूरत गुलदस्ता बेहद सराहनीय है।

    जवाब देंहटाएं
  10. शानदार प्रस्तुति ....आदरणीय सुबोध सिन्हा जी को उत्कृष्ट सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  11. आदरणीय दीदी -- आजकी भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए विशेष आभार | आदरणीय सुबोध जी के ब्लॉग की रचानाओं से सजा ये अंक बहुत महत्वपूर्ण हैं | विशेषकर सुबोध जी का सार्थक संदेश मानवता के लिए बहुत खास है | सचमुच देहदान से जाति धर्म के सारे शापों से मुक्त हो , मानवता के लिए कुछ के देने का संतोष अगली यात्रा जरुर सार्थक कर देगा | अतः अंगदान और देहदान का संकल्प मानवता के लिए वरदान है | परिवारजन इसमें सहयोग कर इसे सार्थक कर सकते हैं | सुबोध जी ने कम समय में ही ब्लॉग जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाई है | उनकी प्रयोगवादी भावपूर्ण रचनाएँ नये प्रतीकों और नवल बिम्ब - विधान के साथ विचारणीय होती हैं | उनकी बुद्ध को समर्पित रचना विशेष है , जो प्रस्तुति की रचनाओं के अलावा विशेष उल्लेखनीय है | सुबोध जी को उनकी इस उपलब्धि पर विशेष शुभकामनायें और बधाई देती हूँ | उनकी लेखनी पर माँ शारदे असीम कृपा बनी रहे यही कामना करती हूँ | उनकी रचनाओं के साथ उनका संक्षिप्त परिचय भी हो जाता तो और भी अच्छा होता | पुनः सादर आभार |

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रेणु जी आपकी इन उपर्युक्त अपनापन से भींजे वक्तव्य ने यह तो उजागर कर दिया कि आप मेरे ब्लॉग में पूरी तरह गोते लगाई हैं। अच्छा लगा आपका विश्लेषण। आपके मन को मेरी रचनाओं की तुच्छ बिम्ब ऐसे ही मुदित करती रहे, प्रयास रहेगा।
      मैं नास्तिक माँ शारदे को तो ना जानता हूँ और ना मानता हूँ। मेरे लिए तो आप पाठकगण ही सबकुछ हैं। आपलोगों को ही नमन मेरा।
      आप संक्षिप्त परिचय की बात कर रही थी .... मुझ जैसे अदना इंसान का परिचय हमेशा संक्षिप्त ही तो होता है ना।
      मैं मूल रूप से पटना (बिहार) का रहने वाला जो अब 19 साल पहले पिता जी के धनबाद (झारखण्ड) में मकान बनवाने से वहाँ का हो गया हूँ।
      वर्तमान में पटना साहिब के एक निजी संस्थान में कार्यरत हूँ। पूर्ववत में सेल्स & मार्केटिंग के क्षेत्र में था। गणित में स्नातक हूँ। जाति तो मैं मानता नहीं। वैसे लोगों ने तथाकथित कायस्थ जाति का टैग लगा रखा है।
      अब तक के उम्र के 53वें पड़ाव की कोई भी चल-अचल सम्पति की उपलब्धि नहीं है । उपलब्धि मानता हूँ ... बस मेरी धर्मपत्नी- मधु की देंन एक 22 वर्षीय बेटा - शुभम जो आई. आई. टी.- गौहाटी से बी. टेक. (2015-2019) उत्तीर्ण (9.2) आप लोगों के आशीर्वाद से इसी 01.07.19 से मुम्बई में एक अंतराष्ट्रीय संस्था में कार्यरत है। .....
      मन से नमन आपको ...

      हटाएं
  12. रचनांमकता के सशक्त प्रतिमान सुबोध जी पर सरस्वती अपनी अगाध कृपा बरसाती रहें और उनके नए बिम्ब, नए प्रयोग और अनूठी शैली साहित्य जगत को चमत्कृत करती रहे, यहीं कामना है। हमें पता है कि उनको सामने से सुनना अनुभूतियों के एक अलौकिक अहसास की सुखद सैर है। शुभकामनाएं और बधाई!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. विश्वमोहन जी आपकी प्रेमयुक्त सराहना गर्व का अहसास कराने लगा जैसे ... वैसे मैं कुछ भी तो नहीं ... बस यूँ ही .... आपलोगों की निगाहों में बस यूँ ही आपलोगों को भाती रहे मेरी रचना और वाचन ... शुभकामनों और बधाई के लिए मन से धन्यवाद आपका ...

      हटाएं

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