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शुक्रवार, 8 मार्च 2019

1330....एक स्त्री के लिए समाज की सोच कभी नहीं बदलती

स्नेहिल अभिवादन

"अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" एक तारीख़ है आधी आबादी 
के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए,यह जताने के लिए पुरुषसत्ता समाज में उनका भी सम्मान किया जाता है।  
बड़ी-बड़ी बयानबाजियों और नारी सुरक्षा के तमाम एक्ट पारित होने के बावजूद अभी भी समाज में और दोषपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया के आगे लाचार है शिकार महिला वर्ग। 
क्यों नारी को एक देह के रुप में ही देखा जाता है?  
स्वयं अपने बूते हर क्षेत्र में आगे रहने के बावजूद पुरुषों 
की छत्रछाया में सुरक्षा ढूँढती औरत सच में इतनी ही 
निरीह है क्या?  चाहे नारी स्वतंत्रता और बदलाव की 
जितनी भी डुगडुगी पीट ली जाय पर सच तो यही है कि
एक स्त्री के लिए समाज की सोच कभी नहीं बदलती।
आदरणीया रेवा जी

हाँ मैं हूँ एक माँ
खड़ी ढाल की तरह
अपने बच्चों के साथ 
उनके हर तकलीफ़ में
डट कर सामना करने को
उन्हें बचाने को तैयार

चाहे हालात कैसे भी हो
चाहे मुसीबत कैसी भी हो
पर फिर भी हूँ इन्सान
★★★★★
आदरणीय श्याम बिहारी श्यामल जी
ठेस-ठोकरों ने केवल दर्द नहीं दिया


हज़ारों साल का वक़्त, अनगिन बुज़ुर्गात
दुनिया को सजाते रहे तमाम तजुर्बात

याद है तारीख़-ए-आदम को कहानी
कहां-कैसे शुरू औ' अब यहां तक यह बात
★★★★★
संजय भास्कर जी

एक - एक शब्द जोड़कर कर 
लिखता हूँ एक नज्म तुम्हारे लिए 
क्योंकि तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में 
होना भी 
एक खूबसूरत नज्म के समान है    
इन शब्दों को पढ़कर 
क्या तुम प्यार करोगी न 
★★★★★
आदरणीय ज्योति सिंह जी
खिले हुए फूल 
धीरे धीरे मुरझा जायेंगे 
इनके चटक रंग 
उदासी में बदल जायेंगे 
बसंत की नियति है 
पतझड़
फिर भी बसंत लौटता है 

अगले बरस .
★★★★★
मेरी धरोहर से
आदरणीय अशोक वाजपेयी जी
एक बार जो...


फूल शब्द या प्रेम
पंख स्वप्न या याद
जीवन से जब छूट गए तो
फिर न वापस आएंगे।
अभी बचाने या सहेजने का अवसर है
अभी बैठकर साथ
गीत गाने का क्षण है।
★★★★★

आदरणीय विश्वमोहन जी

 हम पूरा इतिहास उकटना नहीं चाहते. 
हाँ, इतना जरुर जोड़ेंगे कि नारियों के 
उन्नयन की दिशा में जो सदियों की सामाजिक क्रांतियां सौ चोट सुनार के मारती रहीं, वो इक्कीसवीं सदी की सूचना क्रांति ने 
एक चोट लोहार के में तमाम कर दिया. 
अब सारी दुनिया उसकी उंगलियों में लिपट गयी.उसका वेबसाइट और ब्लॉग उसके सम्मुख था. उसके व्यक्तित्व को मुक्त गगन मिला और उसकी मुलायम भावनाओं ने पंचम में आलाप भरना शुरु कर दिया. उसे अपनी मौलिकता से साक्षात्कार हो गया. उसके अंतःस की रचनात्मकता कुसुमित होने लगी. उसे अपनी सृजनात्मकता के सौंदर्य की अभिव्यक्ति का विस्तृत वितान मिल गया. उसकी श्रृंगारिकता उसके सामजिक सरोकार की शोभा बन गयी
★★★★★
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हमक़दम के विषय के संदर्भ
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कल का अंक पढ़ना न भूलें,
कल आ रही हैं आदरणीया विभा दी
विशेष प्रस्तुति लेकर।

घर की चौखट के भीतर
बोनसाई, कृत्रिम सजावटी फूल
और बाहर बथान में बंधे
दुधारू गोरु जैसा
डालकर अपनी कोमल
संवेदनाएँ चक्की में,
पिसकर पाटों में
भरती रहती है घर के
खाली कमरों को
निर्विकार,आजीवन
स्त्री है।

25 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुभकामनाएँ
    बेहतरीन प्रस्तुति..
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. हर पल के लिए शुभकामनाएं
    सुंदर संकलन

    जवाब देंहटाएं
  3. महिला दिवस की मंगलकामनाएं। सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!!खूबसूरत प्रस्तुति श्वेता ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सबसे पहले सभी महिलाओं को महिला दिवस पर शुभकामनाएँ...खूबसूरत सुंदर संकलन श्वेता जी मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार !!

    जवाब देंहटाएं
  6. शानदार संकलन.. हर दिन के लिए शुभकामनाएँ
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहतरीन लिंक्स एवम अनुपम प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. महिला दिवस की अनंत शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  9. "अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" की शुभकामनाएं!!!

    जवाब देंहटाएं
  10. महिला दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।
    बहुत दमदार भुमिका के साथ शानदार प्रस्तुति श्वेता सभी रचनाकारों को बधाई । 6

    जवाब देंहटाएं
  11. सर्व प्रथम महिला दिवस की सभी मित्रों ढेरो शुभकामनाएं ,साथ ही यहाँ आमंत्रित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, क्योंकि यहां आने के बाद सभी की रचनाओं को पढ़ने का लाभ मिला रचनाये सभी बढ़िया है |शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  12. सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं

    जवाब देंहटाएं
  13. संयमित चाह का विस्तार नही होता
    दर्द से दर्द का श्रृंगार नहीं होता ,
    टूट जाये जो समय की आँधियों के साथ ही
    बस हविश है देह का ,वो प्यार नही होता ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. व्वाहहह..
      आभार..
      सादर...

      हटाएं
    2. दिल से आप सभी की आभारी हूँ ,धन्यवाद

      हटाएं
    3. यू तो कोई गिला नही
      सब कुछ था क्या नही था ,
      फिर भी एक कमी सी थी
      जिसका पता नही था ।
      जाने क्या बात हुई
      जाने क्या बात हुई ?

      हटाएं
  14. तू खुद तो बदल
    तू खुद तो बदल
    तभी तो जमाना बदलेगा ,
    गंगा की धारा बदलेगी
    मंजिल की राहें बदलेगी ।

    जवाब देंहटाएं
  15. मुस्कुराकर दर्द भूलाकर
    रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी ,
    हर पग को रौशन करने वाली
    वो शक्ति है ,एक नारी ।
    अपनी छोटी छोटी कुछ रचनाओं के साथ आप सभी को महिला दिवस की बधाई देती हूँ ।यू तो हर दिन महिला और पुरूष का है ,इसलिये प्रयास यही हो आपस मे समानता का भाव उजागर हो ।आदर देंगे तो ही आदर पायेंगे,

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हम सभी आह्लादित हैंं.
      आभार आपका...
      आते रहिएगा...
      सादर...

      हटाएं
    2. शुक्रिया आप सभी का दिल से, नमस्कार

      हटाएं
  16. अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ।
    सुन्दर एवं विचारणीय रचनाओं का संकलन।

    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    उपसंहार में स्त्री-विमर्श पर गहन चिंतन की ओर आकृष्ट करती श्वेता जी की रचना प्रशंसनीय है।

    जवाब देंहटाएं
  17. शानदार प्रस्तुतिकरण उम्दा पठनीय लिंक्स...

    जवाब देंहटाएं
  18. बहुत शानदार प्रस्तुति ,महिला दिवस की हार्दिक बधाई

    जवाब देंहटाएं

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