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सोमवार, 13 नवंबर 2017

850...हक़ीक़त तो कुछ और है !

देर रात डेढ़ बज रहे थे कुछ क़दमों की आहट रात के अंधेरे को चीरती हुई लैब में दाख़िल हुई । मैं एकाएक दरवाज़े की तरफ भागा मेरे सम्मुख एक विकृत काली परछाई सामने आकर खड़ी हो गई। मैं दंग रह गया ! प्रोफेसर रमन ख़ून से लथपथ हाथ में कुछ पेपर्स लेकर मेरी ओर बढ़ रहे थे, और मैं एक ओर सहमा -सहमा खड़ा हो गया। उनकी भाव -भंगिमा रोज से बदली बदली नज़र आ रही थी। तभी वे मेरी ओर लपके, मैं चीख़ उठा ! 
मेरी नींद खुल गई। 

चलो छोड़ो ये सब तो बेकार की बातें हैं। ये तो एक सपना था 
हक़ीक़त तो कुछ और है, 
सपने सच नहीं होते। 
सच तो केवल हम , 
हमारा अस्तित्व 
और हमारा 
८५० वां अंक ! 

सादर अभिवादन। 

आदरणीय "पुरुषोत्तम सिन्हा"

 ख्यालों की जैसे कोई गहना,
पहनता हूँ हरबार जब भी ख्यालों को हो सँवरना,
सँवरते हैं ख्याल, सँवरती है ये कल्पना,
नव-श्रृंगार कर, जीवंत हो उठती है रचना......

आदरणीय "विश्वमोहन" जी 

 'अर्जुन' संज्ञाशून्य न होना
कुरुक्षेत्र की धरती पर
किंचित घुटने नहीं टेकना
जीवन की सुखी परती पर
सकने भर जम कर तुम लड़ना
चाहे हो किसी की जीत
अपने दम पर ताल ठोकना

गाना हरदम विजय का गीत !

आदरणीया "अनामिका घटक " 

 शून्य का मैं खोज हूँ 
शून्य का मैं ओज हूँ 
शून्य  के रथ पर सवार 
शून्य का मैं आज हूँ 

आदरणीया "रिंकी राउत" जी  

 धीमे-धीमे दहक रहे है
आँखों में गुजरे प्यार वाले पल
राख हो कर भी सपने
गर्म है
बुझे आंच की तरह


आदरणीया "सुधा सिंह" 

बात नहीं करती मैं
 तारों और सितारों की
न ही मैं बात करती हूँ
खूबसूरत नजारो की
मैं बात करती हूँ
इंसानियत के पहरेदारों की



20 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    लगता है आपको कल दिन में सपना आया
    तब ही रात की घटना बयां कर रहे है
    बेहतरीन रचनाएँ
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. असीम शुभकामनाओं के संग शुभप्रभात
    850 वें अंक की प्रस्तुति के लिए बधाई
    उम्दा लिंक्स चयन

    जवाब देंहटाएं
  3. आज की यह प्रस्तुति कई माइने में महत्वपूर्ण है-
    1 मील का पत्थर (Milestone): चल की 850वीं प्रस्तुति
    2. लक्ष्यभेदक (Target Oriented) - 2 लाख से अधिक की viewership. पाठकों के हृदय तक पहुँचने में सक्षम
    3 क्रियाशीलता (Activity) - आदरणीय यशोदा दीदी की लगन और सतत मार्गदर्शन
    4 गतिशीलता (Dynamism) - समस्त संपादक मंडल का कुशल संपादन तथा विविध स्वरूप नित नए आयाम लिहहहुए
    5 विविधता (Diversity) - विभिन्न रचनाकारों का विविध नजरिया
    6 सृजनात्मकता (Creativity) - रचनाकारों की आकर्षक प्रस्तुति एक से बढकर एक और संपादकों की अनूठी प्रस्तुति उससे भी बढकर
    7 मेरे लिए खास अवसर जबकि मेरी 750वीं रचना भी इस अंक मे शामिल है और हलचल से प्राप्त सहयोग के कारण मेरे ब्लाॅग purushottamjeevankalash.bligspot.com की viewership मात्र 2-3 वर्षों में 54000 से अधिक हो चुकी है।

    आगे की सफलता की कामना के साथ एकलव्य जी को आज के इस विशेष प्रस्तुति का अवसर मिलने के लिए बधाई।
    बधाई हलचल टीम के सभी सदस्यों व चर्चाकारों को भी।

    जवाब देंहटाएं
  4. 850वें पन्ने में प्रवेश के लिये हलचल परिवार के सभी सद्स्यों को बधाई और शुभकामनाएं। बहुत सुन्दर प्रस्तुति। टंकण से हुई नाम में त्रुटि को ठीक करलें अनामिका घटक होना चाहिये।

    जवाब देंहटाएं
  5. 850 अंक. पूरे हो गये आज....
    बहुत ही बड़िया प्रस्तुति आनंदित कर गयी....
    आभार सर आप का....

    जवाब देंहटाएं
  6. ८५०वें अंक पूरे होने पर बहुत बधाई सभी को। हार्दिक शुभकामनाएँ है दिनोंदिन हलचल की खुशबू फैलती रहे।
    बहुत ही उम्दा लिंको का संयोजन किया है आपने ध्रुव जी।
    सारी रचनाएँ बेहतरीन है।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. उषा स्वस्ति.. ध्रुव जी,सर्वप्रथम ८५०वें अंक पूरे होने पर बहुत बधाई सभी को..
    प्रभावपूर्ण भूमिका के साथ
    उम्दा पठनीय लिंक संकलन बेहतरीन प्रस्तुतिकरण
    सभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  9. आठ सौ पच्चास...
    मतलब दिन भी इतने ही
    अवकाश की तो बात ही नहीं
    दो दिन दो दो अंक आ गए
    वाह...
    शुभकामनाएँ....
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  10. आदरणीय धुव जी, आपकी खोजी दृष्टि लाज़वाब. बहुत सुन्दर रचनाओं का संकलन किया है आपने. आदरणीय अनामिका घटक जी की रचना बेहद पसंद आयी. अन्य सभी रचनाएं एक से एक हैं.
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई.
    कल हलचल पर नहीं आ सकी. क्षमा चाहती हूँ.
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति. 850 वें अंक की बधाई. सुन्दर रचनाएं. सभी रचनाकारों को बधाई हमारी ओर से.

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण उम्दा लिंक संकलन....

    जवाब देंहटाएं
  13. हलचल परिवार हर पल पल्लवित हो और अपनी प्रगति के प्रवाह का संवेग बनाए रखे!सुन्दर संकलन का साधुवाद और इस परंपरा की शाश्वतता की शुभकामनाएं!!!!

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण सुंदर लिंक संकलन. 850वें अंक की बधाई

    जवाब देंहटाएं
  15. आज इस विशेषण की प्रस्तुति पर गदगद हैं हम। सभी स्नेही जन टीकाकारों का तहे दिल से अभिनंदन हार्दिक स्वागत। आप के सतत स्नेह नहीं हमें यह मुकाम हासिल करने का अवसर दिया और आल्हादित होने का खुशियां मनाने का खुशियां बांटने का गुफ्तगू करने का सुंदर सुघड़ प्लेटफार्म दिया है। अब आप सभी स्नेही जनों से हमारी उम्मीदें बढ़ गई हैं। ध्रुव जी अपनी पूरी ऊर्जा के साथ प्रस्तुति लेकर आ रहे हैं कोशिश उनकी यही रहती है कि नवीनता और परिवर्तन आप सब को प्रभावित कर सकें। ध्रुव जी के लिए एक सलाह , भूमिका में जिस सपने का वे जिक्र कर रहे हैं बड़ी ही रोमांचक कहानी उसमें छिपी हुई है जिसे भी पूरा करें। इस विशेषांक में चयनित सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आदरणीय पुरुषोत्तम जी ने बहुत सुंदर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। आप सभी की आज की टिप्पणियां हमारा मनोबल बढ़ाने वाली हैं । हमारी कोशिश रहेगी आपकी अपेक्षाओं पर सदैव खरे उतरते रहें। आभार सादर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्षमा करें कृपया तीसरी पंक्ति में अंतिम शब्द नहीं को ने ही पढ़ें। धन्यवाद।

      हटाएं
  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति. बधाई हो.....850 वाँ अंक सुन्दर है.

    जवाब देंहटाएं
  17. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

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