निवेदन।


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रविवार, 26 अगस्त 2018

1136,,,,एक छुट्टी मारी गई...राखी आज है रविवार के दिन....

सादर नमस्कार...
श्रावणी पूर्णिमा..
उत्सव लेन-देन का
प्यार-प्रतिकार-प्रतिज्ञा
यही सब तो विनिमय करते हैं आज..
चलिए सबसे पहले एक गीत सुनते हैं...




अब चलें रचनाओं की ओर......

एक नया ब्लॉग
ऐतिहासिक सामाजिक युद्ध और राजनैतिक जोंबी...
जोंबी
आने वाले चुनाव के मद्देनजर यह तय है कि सोशल मीडिया में ऐतिहासिक सामाजिक युद्ध छिड़ने वाला है, जिसके साक्षी हम सभी होंगे और लगभग सभी को जाने अनजाने ही इसमें भाग लेना होगा। सोशल मीडिया में जितने भी जाने पहचाने दोस्त हैं उनमें से अधिकतर का पता है कि उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी और कितनी तल्ख होगी। परंतु कई लोग जो बीच बीच में छुपकर घुस आये हैं, वे इस युद्ध के विभीषण होंगे, वे यहाँ से वहाँ तक सारे रिश्तों की बखिया उधेड़ेंगे।


अधूरा संवाद...पुरुषोत्म सिन्हा

बिन बोले तुम सो मत जाना,
रिक्त कभी ना, ये झूला कर जाना,
इन बाहों का हो ना रिक्त श्रृंगार,
रिक्त ना रह जाए, आलिंगन की बात,
अभी अधूरा है इक संवाद......

अनछुआ मन...श्वेता सिन्हा

झुलसता है,
तन की वेदना में,
मौन दुपहरी की तपती
पगलाई गर्म रेत की अंधड़
से घबराया मन छौना
छिप जाना चाहता है
बबूल की परछाई की ओट में


मन की पीड़ा....अनुराधा चौहान

जब अंतर्मन में
खुलती है
पुरानी यादों की
परतें तब मन में
एक अजीब बैचेनी
जन्म लेने लगती है
कुछ अच्छी यादें
सुकून देती

ये मौसम क्यों नही बदल जाता ...!!!...ज़फ़र

यादो के साये मंडराते ,
बेबसी मे हमको डुबाते.
ये जो हैं वो काश नही होता ,
ना तू परेशा,न मैं रोता .
एक दुसरे में हम खो जाते ,
वो शुरुवाती लम्हे क्यों नही लौट आते ...

ग़म की रेत पे....लोकेश नदीश

यूँ भी दर्द-ए-ग़ैर बंटाया जा सकता है
आंसू अपनी आँख में लाया जा सकता है

ख़ुद को अलग करोगे कैसे दर्द से, बोलो
दाग़, ज़ख्म का भले मिटाया जा सकता है

कभी तो मिलेंगे....अभिलाषा चौहान

वो ढलती हुई सुरमई शाम में
तुम्हारी पहली झलक
जैसे उतर आया हो
कोई चांद जमीं पर
बिखर गई सर्वत्र
तुम्हारे रूप की चांदनी

लोग आते हैं, पढ़ते हैं
हैरत है इस अंक की 
एक भी प्रति नहीं बिकी..
उलूक टाईम्स..

रविवारीय मुद्दा...डॉ. सुशील जोशी
शिक्षक संघर्ष समिति खफा सुन राज्य सरकार
वादाखिलाफी का लगाया आरोप किया खबरदार।

खबर है "बेरोजगार और शिक्षक सरकार से खफा"
"बेरोजगार शिक्षक" होती तो ज्यादा आता मजा।

चलते-चलते एक ग़ज़ल सुनिए.. 
ब्रिटिश सिंगर तान्या विल्स...


फिर मिलेंगे दिग्विजय...















शनिवार, 25 अगस्त 2018

1135... रक्षाबंधन


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सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


यूँ तो कल रक्षाबन्धन है लेकिन हमारे घर में कई दिनों से उल्लास छाया हुआ है
बेटा बहू अमेरिका में हैं , उन्हें राखी भारत से आ रही...
ड्योढ़ी के बाहर ; ज्यादा देर , मेरे रहने से मेरे पति महोदय को दो दिन पहले ही लगा कि इस बार मेरे घर में राखी नहीं मना
परसों पूरे दिन परेशान रहे कि आज ही राखी है...
जब तक मैं घर में रही , बोलते रहे कि आज ही राखी है। तुम कुछ भी तैयारी नहीं की ना जाने क्यों!

जब मैं बाहर गोष्ठियों में थी तो फोन किये आज ही राखी थी तुम घूमने के चक्कर में भूल गई... तुम्हारे आस-पास जो लोग हैं उनसे पूछो कि आज ही राखी है कि नहीं 🤣




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फिर मिलेंगे...
हम-क़दम 
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का तैंतीसवाँ क़दम
इस सप्ताह का विषय है
'आँखें'
...उदाहरण...
लो आसमान सी फैल उठीं नीली आँखें
लो उमड़ पड़ीं सागर सी वे भीगी आँखें
मेघश्याम सी घनी घनी कारी आँखें
मधुशाला सी भरी भरी भारी आँखें
एक भरे पैमाने सी छलकीं आँखें 
-दिव्या माथुर


उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है

अंतिम तिथि :: आज शनिवार 25 अगस्त 2018
प्रकाशन तिथि :: 27 अगस्त 2018  को प्रकाशित की जाएगी

रचनाएँ  पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के 
सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें



शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

1134....विपरीत परिस्थितियों का धैर्य

विपरीत परिस्थितियों का जो धैर्य के साथ सामना करते हैं वह 
जीवन में सदा सफलता पाते हैं।

उपर्युक्त कथन की प्रमाणिकता साबित किया है 10 वर्षीय 
बच्ची जेन सदावर्ते ने।
23 अगस्त की सुबह 8:30 बजे मुबंई के परली इलाके में एक 17 मंजिला रिहाइशी  इमारत क्रिस्टल टावर में अचानक आग लग गयी। पूरे इमारत में अफरा-तफरी मच गयी लोग घबरा गये ऐसी घड़ी में 
जेन ने बड़ी बहादुरी और बुद्धिमत्ता से न केवल अपनी बल्कि अपने 
फ्लोर पर मौजूद 13 लोगों की मदद की। उसने अपने स्कूल में सिखाये गये फॉयर सेफ्टी के सबक को बखूबी याद रखा और प्रायोगिक 
तौर पर इस्तेमाल भी किया।
सबसे पहले उसने सबको न घबराने और धैर्य रखने का हौसला दिया 
फिर कॉटन के कपड़े को फाड़कर पानी में भिगोकर उससे 
सभी के नाक और मुँह को
 ढकने को कहा, उसके इस उपाय से धुँए में मौजूद 
कार्बन डॉय ऑक्साइड साँस के साथ भीतर नहीं गया 
और एक एयर प्यूरीफायर की तरह काम किया।
 फिर सबको रुम से गैलरी में ले आई थोड़ी देर बाद 
फॉयर फाइटर्स ने सभी को सुरक्षित नीचे उतार लिया।
 हालाँकि, इस हादसे में 4 लोग मारे गये और 21 लोग हॉस्पिटल में हैं। 
 हादसे के बाद इमारत में सुरक्षा संबंधी नियमों का आकलन,अनेक 
प्रकार की पाबंदी का जिक्र को लेकर बातें और सिर्फ़ बातें जैसा कि हमेशा होता आया है वही हो रहा है। पर, जिन परिस्थितियों में लोग 
अपना आपा खो देते है उन हालात में जेन की बुद्धिमत्ता 
और साहस सराहनीय और अनुकरणीय है।

सादर नमस्कार
चलिए आज की रचनाओं का आनंद लेते हैं
आदरणीय गौतम ऋषिराज जी

आज शब्द साथ नहीं दे रहे, डियर डायरी | जाने कैसे-कैसे अनर्गल से आलाप उठ रहे हैं सीने की तलहट्टियों में से | बाबुषा कोहली की एक कविता का अंश इन दहकते आलापों पर भीगी पट्टियां रखता है देर रात गए इस सुलगते बर्फ़ीले पहाड़ पर | सुनो डायरी मेरी :-

★★★★★

आदरणीया डॉ.अपर्णा त्रिपाठी जी


जिधर भी देखा उधर मुखौटे ही मिले
एक मुद्दत से हमने चेहरा नही देखा

तालियों की गडगडाहटें बता देती हैं
खुशी का मंजर है या खुशामद का हुजूम
★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम सिन्हा जी

संज्ञा-शून्य सा अब हो चला है ये दिल,
विरानियों में ही रमा है ये दिल,
न गम है, न ही है अब इसे विषाद,
विषाद ही गर इसे मिल जाता,
ये दिल! शायद फिर धड़क जाता!
★★★★★
आदरणीया अनिता जी

तुझसे हृदय की धड़कनें
मृत्यु है तेरी गोद में,
श्रद्धासबूरीअर्चना,
नव चेतना हर शब्द में !
★★★★★
आदरणीय पंकज प्रियम् जी

पेट पीठ सटे
अंतड़ियों को 
जब दिखलाता है।
सच कहूँ तब 
लफ्ज़ निःशब्द हो जाता है

★★★★★
आदरणीया अनिता सैनी जी
वेदना

सजदे  न  करेंगे  उनकी   यादों   के
लफ़्ज़ों  से   यहीं   दुआ करतें  मिले
टूटे    दिल  कि  दरारों   में  झांकता
उनकी    यादों   का   कारवां   मिला।




आज का अंक आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।

हमक़दम के विषय के संबंध में

आज के लिए आज्ञा दीजिए
कल का अंक लेकर प्रस्तुत होंगी विभा दी।

गुरुवार, 23 अगस्त 2018

1133....नमन उस सैनिक को जो पानी में सीढ़ी बना ....

सादर अभिवादन। 

केरल में बरसाती पानी 
अब ढलान पर 
मानवता के आयाम 
तीर-कमान पर 
दुष्प्रचार के तंत्र 
सातवें आसमान पर 
मानवता ले रही पुरसुकून की साँस 
करती है नमन उस सैनिक को 
जो पानी में सीढ़ी बना 
बच्चों ने भावों का दरिया बहाया 
तोड़कर गुल्लक सहायता के लिये हाथ बढ़ाया 
संतोष है भारत को आज 
भविष्य की ऐसी पीढ़ी बना।
-रवीन्द्र सिंह यादव  

आइये अब आपको ले चलते हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर- 



मेरी फ़ोटो

पूरब की बहना कोकब तक मनाऊंगा ,
दक्षिण की रानी कोकैसे रिझाऊंगा 
इनका निदान चलोखोजा तोखुद को मैं ,
इटली की आंधी सेकैसे बचाऊंगा 
   समझ नहीं पाता हूँ,  गीत नहीं गाता हूँ ।।


सृष्टि चिर निरुपम....पम्मी सिंह "तृप्ति"



सृष्टि चिर निरुपम

अंतर्मन सा अनमोल भ्रमण 

आत्मा का संस्करण 

किंजल्क  स्वर्ण सरजीत

समस्त भाव

दिव्यपुंज दिव्यपान

प्रज्ञा का भाव

गुँजायमान,



उम्र भर - -- शांतनु सान्याल 






तंतु से कसो जितना, सीने के कुछ 

अदृश्य अनल हैं चिरकालीन, 

सुलगते नहीं उम्र भर। 

इस जीवन 

उत्सव 

का, 


अहसास .. डॉ.इन्दिरा गुप्ता 






हर लम्हा पहलू से गुजरे 

धीरे से सहलाये

आहट की ख्वाहिश सी जागे 

दस्तक कोई दे जाये !  



देवदूत बन आये हैं........अमित निश्छल 


 

आसमान से जीवन को
सहयोग बाँटते धीर रथी
महाप्रलय की बाधा पर भी
स्यंदन, हाँक रहे महारथी


जीवन का सच...... अनुराधा चौहान 



वो क्यों आया
तू क्यों गया
हम क्यों जाएं
बस इन बातों से
आपस में टकराएं
इसने नहीं देखा
उसने नहीं देखा
हमने नहीं देखा
फिर भी खिच गई
बीच में लक्ष्मण रेखा

चलते-चलते प्रस्तुत हैं आदरणीय हर्ष वर्धन जोग साहब के 
मनोहारी फोटो-ब्लॉग की झलकियाँ-   

मानसून के बादल .... हर्ष वर्धन जोग 



ऐसा देखा गया है की बादलों की छटा और घटा नाज़ुक दिलों को बड़ा प्रभावित करती है और बरसात में तरह तरह की कविताओं, गीतों और कहानियों का भी जनम होने लगता है. कविता और गीत लिखने तो बड़े मुश्किल लगते हैं इसलिए फिलहाल मानसून पर हमारा ये फोटो ब्लॉग पेश है. भारत दर्शन के दौरान जगह जगह बादलों को कैमरे में बंद किया था उन में से कुछ को यहाँ बाहर निकाल दिया है:


हम-क़दम के तेतीसवें क़दम
का विषय...
यहाँ देखिए...........



आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार। 
कल शुक्रवारीय प्रस्तुति के साथ आ रहीं हैं आदरणीया श्वेता सिन्हा जी। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

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