विपरीत परिस्थितियों का जो धैर्य के साथ सामना करते हैं वह
जीवन में सदा सफलता पाते हैं।
जीवन में सदा सफलता पाते हैं।
उपर्युक्त कथन की प्रमाणिकता साबित किया है 10 वर्षीय
बच्ची जेन सदावर्ते ने।
बच्ची जेन सदावर्ते ने।
23 अगस्त की सुबह 8:30 बजे मुबंई के परली इलाके में एक 17 मंजिला रिहाइशी इमारत क्रिस्टल टावर में अचानक आग लग गयी। पूरे इमारत में अफरा-तफरी मच गयी लोग घबरा गये ऐसी घड़ी में
जेन ने बड़ी बहादुरी और बुद्धिमत्ता से न केवल अपनी बल्कि अपने
फ्लोर पर मौजूद 13 लोगों की मदद की। उसने अपने स्कूल में सिखाये गये फॉयर सेफ्टी के सबक को बखूबी याद रखा और प्रायोगिक
तौर पर इस्तेमाल भी किया।
फ्लोर पर मौजूद 13 लोगों की मदद की। उसने अपने स्कूल में सिखाये गये फॉयर सेफ्टी के सबक को बखूबी याद रखा और प्रायोगिक
तौर पर इस्तेमाल भी किया।
सबसे पहले उसने सबको न घबराने और धैर्य रखने का हौसला दिया
फिर कॉटन के कपड़े को फाड़कर पानी में भिगोकर उससे
सभी के नाक और मुँह को
फिर कॉटन के कपड़े को फाड़कर पानी में भिगोकर उससे
सभी के नाक और मुँह को
ढकने को कहा, उसके इस उपाय से धुँए में मौजूद
कार्बन डॉय ऑक्साइड साँस के साथ भीतर नहीं गया
और एक एयर प्यूरीफायर की तरह काम किया।
कार्बन डॉय ऑक्साइड साँस के साथ भीतर नहीं गया
और एक एयर प्यूरीफायर की तरह काम किया।
फिर सबको रुम से गैलरी में ले आई थोड़ी देर बाद
फॉयर फाइटर्स ने सभी को सुरक्षित नीचे उतार लिया।
फॉयर फाइटर्स ने सभी को सुरक्षित नीचे उतार लिया।
हालाँकि, इस हादसे में 4 लोग मारे गये और 21 लोग हॉस्पिटल में हैं।
हादसे के बाद इमारत में सुरक्षा संबंधी नियमों का आकलन,अनेक
प्रकार की पाबंदी का जिक्र को लेकर बातें और सिर्फ़ बातें जैसा कि हमेशा होता आया है वही हो रहा है। पर, जिन परिस्थितियों में लोग
अपना आपा खो देते है उन हालात में जेन की बुद्धिमत्ता
और साहस सराहनीय और अनुकरणीय है।
प्रकार की पाबंदी का जिक्र को लेकर बातें और सिर्फ़ बातें जैसा कि हमेशा होता आया है वही हो रहा है। पर, जिन परिस्थितियों में लोग
अपना आपा खो देते है उन हालात में जेन की बुद्धिमत्ता
और साहस सराहनीय और अनुकरणीय है।
सादर नमस्कार
चलिए आज की रचनाओं का आनंद लेते हैं
★
आदरणीय गौतम ऋषिराज जी
आज शब्द साथ नहीं दे रहे, डियर डायरी | जाने कैसे-कैसे अनर्गल से आलाप उठ रहे हैं सीने की तलहट्टियों में से | बाबुषा कोहली की एक कविता का अंश इन दहकते आलापों पर भीगी पट्टियां रखता है देर रात गए इस सुलगते बर्फ़ीले पहाड़ पर | सुनो डायरी मेरी :-
★★★★★
आदरणीया डॉ.अपर्णा त्रिपाठी जी
जिधर भी देखा उधर मुखौटे ही मिले
एक मुद्दत से हमने चेहरा नही देखा
तालियों की गडगडाहटें बता देती हैं
खुशी का मंजर है या खुशामद का हुजूम
★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम सिन्हा जी
संज्ञा-शून्य सा अब हो चला है ये दिल,
विरानियों में ही रमा है ये दिल,
न गम है, न ही है अब इसे विषाद,
विषाद ही गर इसे मिल जाता,
ये दिल! शायद फिर धड़क जाता!
विरानियों में ही रमा है ये दिल,
न गम है, न ही है अब इसे विषाद,
विषाद ही गर इसे मिल जाता,
ये दिल! शायद फिर धड़क जाता!
★★★★★
आदरणीया अनिता जी
तुझसे हृदय की धड़कनें
मृत्यु है तेरी गोद में,
श्रद्धा, सबूरी, अर्चना,
नव चेतना हर शब्द में !
★★★★★
आदरणीय पंकज प्रियम् जी
पेट पीठ सटे
अंतड़ियों को
जब दिखलाता है।
सच कहूँ तब
लफ्ज़ निःशब्द हो जाता है।
★★★★★
आदरणीया अनिता सैनी जी
वेदना
सजदे न करेंगे उनकी यादों के
लफ़्ज़ों से यहीं दुआ करतें मिले
टूटे दिल कि दरारों में झांकता
उनकी यादों का कारवां मिला।
★
अंतड़ियों को
जब दिखलाता है।
सच कहूँ तब
लफ्ज़ निःशब्द हो जाता है।
★★★★★
आदरणीया अनिता सैनी जी
वेदना
सजदे न करेंगे उनकी यादों के
लफ़्ज़ों से यहीं दुआ करतें मिले
टूटे दिल कि दरारों में झांकता
उनकी यादों का कारवां मिला।
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आज का अंक आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
हमक़दम के विषय के संबंध में
आज के लिए आज्ञा दीजिए
कल का अंक लेकर प्रस्तुत होंगी विभा दी।






