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शनिवार, 25 अगस्त 2018

1135... रक्षाबंधन


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सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


यूँ तो कल रक्षाबन्धन है लेकिन हमारे घर में कई दिनों से उल्लास छाया हुआ है
बेटा बहू अमेरिका में हैं , उन्हें राखी भारत से आ रही...
ड्योढ़ी के बाहर ; ज्यादा देर , मेरे रहने से मेरे पति महोदय को दो दिन पहले ही लगा कि इस बार मेरे घर में राखी नहीं मना
परसों पूरे दिन परेशान रहे कि आज ही राखी है...
जब तक मैं घर में रही , बोलते रहे कि आज ही राखी है। तुम कुछ भी तैयारी नहीं की ना जाने क्यों!

जब मैं बाहर गोष्ठियों में थी तो फोन किये आज ही राखी थी तुम घूमने के चक्कर में भूल गई... तुम्हारे आस-पास जो लोग हैं उनसे पूछो कि आज ही राखी है कि नहीं 🤣




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फिर मिलेंगे...
हम-क़दम 
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का तैंतीसवाँ क़दम
इस सप्ताह का विषय है
'आँखें'
...उदाहरण...
लो आसमान सी फैल उठीं नीली आँखें
लो उमड़ पड़ीं सागर सी वे भीगी आँखें
मेघश्याम सी घनी घनी कारी आँखें
मधुशाला सी भरी भरी भारी आँखें
एक भरे पैमाने सी छलकीं आँखें 
-दिव्या माथुर


उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है

अंतिम तिथि :: आज शनिवार 25 अगस्त 2018
प्रकाशन तिथि :: 27 अगस्त 2018  को प्रकाशित की जाएगी

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